खाने से पहले भोजन को प्रणाम क्यों करते थे हमारे बुजुर्ग, अन्न को क्यों माना गया देवी अन्नपूर्णा का स्वरूप?
भारतीय घरों में भोजन से पहले अन्न को प्रणाम करने की परंपरा पुरानी है। जानिए देवी अन्नपूर्णा से जुड़ी इस मान्यता के पीछे क्या वजह है।
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भोजन को प्रणाम क्यों करते हैं? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि भोजन शुरू करने से पहले अन्न को प्रणाम करने की परंपरा आखिर क्यों निभाई जाती है? अपने घर में भी आपने बड़ों से यह लाइन जरूर सुनी होगी। चलिए आज इस आर्टिकल में इसी परंपरा के पीछे की मान्यता के बारे में समझते हैं।
अन्न को देवता क्यों माना गया है?
हमारे हिंदू धर्म में अन्न (भोजन) को सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि साक्षात देवता का रूप माना गया है। शास्त्रों में अन्न को देवी अन्नपूर्णा का स्वरूप कहा गया है, जो माता पार्वती का ही एक रूप हैं। ऐसा माना जाता है कि माता अन्नपूर्णा ही इस पूरी दुनिया का पेट भरती हैं। जब हम भोजन से पहले हाथ जोड़ते हैं, तो असल में हम माता को धन्यवाद कj रहे होते हैं कि उन्होंने हमें आज का भोजन नसीब कराया।
आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित 'अन्नपूर्णा स्तोत्र' में एक श्लोक है जिसमें अन्न या भोजन का महत्व बताया गया है-
अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥
अर्थ- हे मां अन्नपूर्णा! आप हमेशा पूर्ण (भरी-पूरी) रहने वाली हैं और भगवान शिव की प्राणवल्लभा (प्राणों से भी प्यारी पत्नी) हैं। हे माता पार्वती! मुझे आत्मज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति के लिए भिक्षा (अन्न और अपनी कृपा) दें।
भोजन का अपमान और बर्बादी क्यों है अशुभ?
अक्सर कहा जाता है कि थाली में खाना खाने के बाद थोड़ा बहुत छोड़ना या खाना फेंकना बहुत बड़ा पाप है। इसके पीछे की सीधी सी मान्यता यह है कि जब हम खाना बर्बाद करते हैं, तो यह सीधे तौर पर देवी अन्नपूर्णा का अपमान माना जाता है। पुरानी कथाओं में बताया गया है कि जो लोग अन्न की कद्र नहीं करते, उनके घर में धीरे-धीरे दरिद्रता (गरीबी) आने लगती है। वहीं, जो परिवार अन्न का सम्मान करते हैं, वहां हमेशा सुख-शांति और बरकत बनी रहती है। इसलिए उतना ही खाना लेना चाहिए, जितनी आपको भूख हो।
कृतज्ञता जताने का सही तरीका क्या है?
हमारे यहां खाना खाने का भी एक सलीका है। जब सामने थाली आए, तो तुरंत खाने पर टूट पड़ने के बजाय थोड़ा रुककर हाथ जोड़ें। मन ही मन भगवान और उस किसान को धन्यवाद दें, जिसकी कड़ी मेहनत से वह निवाला आप तक पहुंच रहा है। यह आभार उस इंसान के लिए भी है जिसने प्यार से आपके लिए खाना पकाया है। बहुत से घरों में आज भी भोजन शुरू करने से पहले "अन्नपूर्णे सदा पूर्णे..." मंत्र का जप किया जाता है उसके बाद ही खाना शुरू करने की प्रथा है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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