हिंदू परंपरा में बेहद खास है 'द्वार पूजन', हर विवाह में क्यों निभाई जाती है यह रस्म? ज्योतिषी ने बताया
हिंदू शादियों में बारात के दरवाजे पर आते ही द्वार पूजन क्यों किया जाता है? जानिए एस्ट्रोपत्री की ज्योतिषी रजनी गुप्ता से इस खास रस्म का असली धार्मिक महत्व।
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क्यों होती है द्वार पूजन? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शादियों के रस्म-रिवाज के पीछे एक बहुत ही खूबसूरत मतलब छिपा हुआ है। शादी वाले दिन का सबसे खुशनुमा पल वह होता है जब नाचते-गाते, बैंड-बाजे के साथ बारात दुल्हन के दरवाजे पर पहुंचती है। बारात के पहुंचते ही जो सबसे पहली रस्म निभाई जाती है, उसे हम 'द्वार पूजन' (Dwar Puja) कहते हैं।
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बारात के दरवाजे पर आते ही यह पूजा क्यों की जाती है? दरअसल, यह सिर्फ कोई आम रिवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे बहुत ही गहरी धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक बातें जुड़ी हुई हैं।
एस्ट्रोपत्री की ज्योतिषी रजनी गुप्ता ने इस खास रस्म के बारे में बहुत ही खूबसूरती से बताया है। उनका कहना है कि हमारी भारतीय संस्कृति हमेशा से 'अतिथि देवो भव:' की भावना पर चलती आ रही है। द्वार पूजन का सीधा मतलब यही है कि दुल्हन या फिर लड़की वालों का परिवार, वर पक्ष यानी दूल्हे और उसके परिवार का पूरे दिल से और सम्मान के साथ आदर-सत्कार कर रहा है। यह एक तरीके से नए रिश्तेदारों को प्यार और इज्जत के साथ अपने घर में दाखिल करने की प्रक्रिया है।
क्या है इस रस्म के धार्मिक पहलू?
अगर हम इसके धार्मिक पहलू को समझें तो, हिंदू धर्म की यह मान्यता है कि कोई भी मांगलिक काम भगवान को याद किए बिना पूरा नहीं होता। शादी जीवन का सबसे बड़ा और अहम फैसला माना जाता है। इसलिए, द्वार पूजन के समय सबसे पहले भगवान को याद किया जाता है और उनका आह्वान किया जाता है। बड़े-बुजुर्गों का मानना है कि ऐसा करने से शादी वाले माहौल में एक सकारात्मक ऊर्जा (पॉजिटिव एनर्जी) आती है और किसी भी तरह की बुरी नजर या नकारात्मक शक्तियां मंडप से कोसों दूर रहती हैं।
इस रस्म में भी सबसे पहले आते हैं भगवान गणेश
इस पूरी रस्म में विघ्नहर्ता भगवान गणेश (Lord Ganesha) और माता गौरी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। हम सभी जानते हैं कि किसी भी शुभ काम से पहले गणेश जी को मनाया जाता है, ताकि शादी की किसी भी रस्म में कोई अड़चन या बाधा न आए। वहीं, माता गौरी की पूजा करके उनसे यह आशीर्वाद मांगा जाता है कि दूल्हा-दुल्हन का दांपत्य जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे।
सही मायनों में देखा जाए तो द्वार पूजन सिर्फ मंत्र पढ़ने की रस्म नहीं है। यह एक दुआ है कि नए जोड़े के वैवाहिक जीवन और आने वाले जीवन की शुरुआत पूरी पवित्रता, अच्छी सोच और हमारे पुराने वैदिक नियम-कानूनों के साथ हो।
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