हवन में आहुति देते समय किस उंगली का करें इस्तेमाल? पूजा निष्फल होने से पहले जान लें नियम
हिंदू धर्म में हवन के दौरान आहुति देते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है ताकि शुभ फल ...और पढ़ें

हवन में आहुति देने के क्या हैं सही नियम? (AI-Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी शुभ और मांगलिक कार्य के दौरान हवन करने का विधान है। हवन में विधिपूर्वक आहुति दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हवन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
लेकिन हवन में आहुति देते समय कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि हवन से जुड़े नियमों का पालन न करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताते हैं हवन से जुड़े नियमों के बारे में।
किस दिशा में होना चाहिए मुख?
हवन के दौरान यजमान का मुख उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। इस दिशा को सबसे पवित्र, ऊर्जावान और शुभ स्थान माना जाता है। इसलिए हवन में आहुति देते समय मुख उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
हवन में आहुति देने के सही नियम
हवन में आहुति देने के लिए अनामिका उंगली (मध्यमा और सबसे छोटी उंगली के बीच वाली उंगली) का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। हिंदू शास्त्रों में इस उंगली को सबसे अधिक पवित्र और दैवीय ऊर्जा से युक्त माना गया है।
अनामिका उंगली के नीचे का हिस्सा सूर्य पर्वत कहलाता है, जिसे सफलता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से हवन में इस उंगली से दी गई आहुति देवी-देवताओं तक शीघ्र पहुंचती है। इसलिए आहुति देते समय अनामिका उंगली का प्रयोग करना शुभ और फलदायी माना जाता है। आहुति देने के लिए तर्जनी उंगली का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस उंगली को क्रोध और अहंकार का प्रतीक माना जाता है।
स्वाहा का करें जप- हवन के दौरान मंत्रों का जप किया जाता है। मंत्र के अंत में 'स्वाहा' बोलने पर ही सामग्री को अग्नि में अर्पित करना चाहिए। इस दौरान मन में किसी के बारे में गलत विचार न सोचें। हवन को सच्चे मन और विधिपूर्वक करना चाहिए।
सही आसन- इस बात का विशेष ध्यान रखें कि हवन के दौरान सीधे जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। हवन करते समय हमेशा कुशा या ऊन के आसन पर बैठना शुभ माना जाता है।
पवित्र सामग्री- आहुति में उपयोग होने वाली सामग्री, घी, जौ, तिल और लकड़ियां (समिधा) पूरी तरह से शुद्ध, कीड़े-रहित और साफ होनी चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
