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हरतालिका तीज की पूजा में इन नियमों का जरूर करें पालन, पति की लंबी उम्र के साथ मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Published: Wed, 09 Sep 2026 02:29 PM (IST)

हरतालिका तीज पर महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन ...और पढ़ें

कैसे पाएं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद?

कैसे पाएं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद?

HighLights

  1. निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करें।

  2. सोलह श्रृंगार कर माता पार्वती को सुहाग अर्पित करें।

  3. पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर वर्ष भाद्रपद शुक्‍ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का त्‍योहार आता है। हिंदू धर्म में इसे बहुत ही महत्‍वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर यह पर्व महिलाओं के लिए होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। व्रत के दौरान महिलाओं को कुछ खास नियमों का पालन करना होता है। तो चलिए जानते हैं इस व्रत से जुड़े जरूरी नियमों के बारे में।

निर्जला व्रत रखने की है परंपरा

हरतालिका तीज का व्रत सामान्य रूप से निर्जला रखा जाता है। यानी व्रत रखने वाली महिलाएं अन्न के साथ-साथ जल का भी सेवन नहीं करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला व्रत तप और सच्‍चे संकल्प का प्रतीक होता है। हालांकि, अब कई महिलाएं इस व्रत में जल ग्रहण कर लेती हैं और कई औरतें इस व्रत को फलाहार भी रखती हैं। मगर नियम के अनुसार यह व्रत हमेशा निर्जला ही रखा जाता है।

सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व

हरतालिका तीज पर महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत में हमेशा नए वस्‍त्र, नए गहने और नया श्रृंगार का सामान इस्‍तेमाल करना होता है। पूजा के समय महिलाएं स्नान करके नए या साफ वस्त्र पहनती हैं और सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी आदि से श्रृंगार को पूरा करती हैं।

धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन लाल, हरे या पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। महिलाएं माता पार्वती को भी सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं और अपने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

पार्थिव शिवलिंग की पूजा

हरतालिका तीज की पूजा में पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन प्रदोष काल में बालू या शुद्ध मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं।

इसके बाद इनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है। आपको बाजार में भी मिट्टी से बनी शिव परिवार की मूर्तियां मिल जाएंगी। पूजा में फूल, फल, बेलपत्र, धूप, दीप और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। इसके साथ शिव-पार्वती की कथा पढ़ी जाती है।

रात में न सोएं

हरतालिका तीज पर रात्रि जागरण की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाओं को रात में सोने के बजाय जागकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करना चाहिए। रात में भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और शिव-पार्वती की कथा का पाठ करने से भक्‍त की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

क्रोध और विवाद से रहें दूर

व्रत के दौरान मन को शांत और प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए। किसी से झगड़ा, विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए। व्रत में केवल भोजन का त्याग नहीं करना चाहिए बल्कि मन और विचारों को भी शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए।

व्रत को बीच में न छोड़ने की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत एक बार शुरू करने के बाद इसे नियमित रूप से हर वर्ष रखने की परंपरा है। कई परिवारों में औरतें इस व्रत को जीवनभर रखती हैं और जब तक उनकी जगह कोई दूसरी महिला व्रत रखने को तैयार नहीं होती है, तब तक व्रत रखना नहीं छोड़ती हैं।

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