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Gangaur 2026: आज है गणगौर पूजा, अखंड सौभाग्य के लिए अभी नोट कर लें सही पूजा विधि और मंत्र

Published: Sat, 21 Mar 2026 07:30 AM (IST)Updated: Sat, 21 Mar 2026 08:41 AM (IST)

गणगौर व्रत (Gangaur Puja 2026 Significance) हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

Gangaur 2026: गणगौर पूजा विधि। (AI Generated Image)

Gangaur 2026: गणगौर पूजा विधि। (AI Generated Image)

HighLights

  1. गणगौर का पर्व बेहद मंगलकारी माना जाता है

  2. इस कठिन व्रत को रखने से शिव-शक्ति की कृपा मिलती है

  3. हर साल यह व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणगौर का पर्व बेहद मंगलकारी माना जाता है। यह हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व (Gangaur 2026) विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति का प्रतीक है। कहते हैं कि इस कठिन व्रत को रखने से शिव-शक्ति की कृपा मिलती है, तो चलिए यहां इस व्रत से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

Mahashivratri 2026  aarti

गणगौर धार्मिक महत्व (Gangaur Puja 2026 Significance)

गण का मतलब है भगवान शंकर और गौर का मतलब है माता गौरी यानी पार्वती। यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम का प्रतिक है। माना जाता है कि देवी पार्वती ने भारी तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में पाया था। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन आने वाली यह पूजा महिलाओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होती है।

गणगौर पूजा विधि (Gangaur Puja Rituals)

  • एक वेदी पर शिव-पार्वती की मिट्टी की बनी प्रतिमा स्थापित करें।
  • माता पार्वती को सोलह शृंगार की सामग्री जैसे कि मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी चढ़ाएं।
  • भगवान शिव को पीले वस्त्र और अक्षत चढ़ाएं।
  • नवरात्र के समय बोए गए जवारे इस पूजा में विशेष रूप से उपयोग किए जाते हैं।
  • फल, मिठाई और घेवर का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान गणगौर व्रत की पौराणिक कथा सुनें या पढ़ें।
  • अंत में आरती करें।
  • पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

पूजन मंत्र

  • ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्॥

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।