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गणेश चतुर्थी 2026 : गणपति की मूर्ति स्‍थापित करने से पहले क्‍यों रखें जाते हैं प्रतिमा के नीचे चावल? क्‍या है इसका महत्‍व

Published: Fri, 11 Sep 2026 08:29 PM (IST)

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते समय उनके आसन के नीचे चावल (अक्षत) रखने की परंपरा का महत्व बताया गया है।

गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्‍थापना । (Picture Credit- AI Generated)

गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्‍थापना ।

(Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. अक्षत का अर्थ है टूटा हुआ न हो, पूर्णता का प्रतीक।

  2. चावल भगवान के लिए पवित्र आधार, स्थापना स्थल शुद्ध करता है।

  3. अन्न-धन की समृद्धि और परिवार पर कृपा बनी रहती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी देवी-देवता की पूजा और स्थापना के दौरान कई छोटी-छोटी परंपराओं को निभाया जाता है। इन्हीं में से एक है गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते समय उनके आसन के नीचे चावल यानी अक्षत रखने की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश जी की प्रतिमा को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उनके आसन के नीचे अक्षत रखना शुभ माना जाता है।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिष चंद्रेश शर्मा के अनुसार, " हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की स्थापना से पहले उनके आसन के नीचे चावल रखने की परंपरा बहुत समय से चली आ रही है। अक्षत का अर्थ है ऐसा अन्न जो टूटा हुआ न हो। इसे पूर्णता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए प्रतिमा की स्‍थापना के वक्‍त उसके नीचे चावल जरूर रखने चाहिए।"

गणेश जी की मूर्ति के नीचे क्यों रखें अक्षत?

गणेश जी को विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला देवता माना जाता है। इसलिए उनकी स्थापना करते समय हर छोटी बात का विशेष ध्यान रखा जाता है। मान्यता है कि चावल भगवान के लिए एक पवित्र आधार या आसन का काम करता है। गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा की चौकी पर अक्षत रखने से स्थापना का स्थान शुद्ध और शुभ हो जाता है। इसके बाद उसके ऊपर आसन रखा जाता है या सीधे प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है।

अन्न और धन की समृद्धि का प्रतीक

चावल को अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में अन्न को बहुत पवित्र माना गया है। चावल का संबंध देवी अन्नपूर्णा और घर की सुख-समृद्धि से भी होता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की स्थापना के समय अक्षत रखने से घर में अन्न-धन की समृद्धि बनी रहती है और परिवार पर उनकी कृपा रहती है।

पूर्णता का देता है संदेश

अक्षत का अर्थ ही है जो खंडित न हुआ हो। इसलिए पूजा में साबुत चावल का प्रयोग पूर्णता और अखंडता का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी की मूर्ति के नीचे अक्षत रखने का भाव यह भी है कि घर में सुख, शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहे और परिवार में किसी तरह की कमी न आए।

कैसे रखें गणेश जी की मूर्ति के नीचे चावल?

गणेश जी की स्थापना से पहले पूजा की चौकी को साफ करके उस पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चावल यानी साबुत अक्षत को पानी से अच्‍छी तरह से धो लें और सुखा लें। इसके बाद एक छोटी सी परत या ढेरी बनाएं। ध्यान रखें कि चावल साफ और टूटे हुए न हों। इसके ऊपर गणेश जी की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।

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