दशहरे के दिन शस्त्र पूजा क्यों होती है जरूरी? विजय और शक्ति से जुड़े इस गुप्त रहस्य को नहीं जानते होंगे आप
दशहरा पर शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है, जो भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत से जुड़ा है।

दशहरा पर शस्त्र पूजा क्यों है जरूरी, विजय से जुड़ा इसका महत्व (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
दशहरा पर शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है।
महाभारत काल से चली आ रही है यह परंपरा।
विजय, शक्ति और साहस का प्रतीक है शस्त्र पूजा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में विजयादशमी का पर्व अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे दशहरा नाम से भी जाना जाता है। यह दिन मुख्य रूप से भगवान राम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत से जुड़ा है। भक्तों के लिए विजयादशमी सिर्फ एक त्योहार नहीं है।
बल्कि इसे धर्म, साहस, भक्ति और नकारात्मकता पर सकारात्मक मूल्यों की जीत का अवसर भी माना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से रावण के पुतले का दहन किया जाता है और उसके साथ बुराइयों का भी दहन होता है, वहीं इस दिन कई अन्य परंपराएं भी निभाई जाती हैं जिनका अलग महत्व होता है।
उन्हीं में से एक है शस्त्र पूजा करना। यही नहीं इस दिन को बहुत सारे कामों जैसे वहां खरीदना, नया बिजनेस शुरु करना भी शुभ माना जाता है। आइए आपको बताते हैं दशहरा के दिन शस्त्रों की पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व होता है।
दशहरा पर क्यों होती है शस्त्र पूजा?
ज्योतिष की मानें तो दशहरा के दिन शास्त्रों और हथियारों की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है और यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि इसकी शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। ऐसा माना जाता है कि अज्ञातवास में जाते समय पांडवों ने अपने हथियार एक शमी के पेड़ में छिपा दिए थे।
एक साल पूरा होने पर, उन्होंने विजयदशमी के दिन ही उस पेड़ से अपने शस्त्रों को वापस लिया था और उन्हीं शास्त्रों को पूजा करके कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए चले गए थे।
उसी समय से दशहरा वाले दिन हर साल शास्त्रों की पूजा विधि-विधान से की जाती है। मान्यता यह भी है कि जिस प्रकार दशहरा यानी विजयदशमी के दिन शास्त्रों की पूजा के बाद युद्ध में अर्जुन और पांडवों की विजय हुई थी, उसी तरह से आज भी जो इस दिन अस्त्र-शास्त्रों की पूजा करता है उसे हर काम में विजय मिलती है।
दशहरा में होती है आयुध पूजा
दशहरा के दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा से मतलब केवल औजारों की पूजा नहीं होता है बल्कि इस दिन आयुध पूजा होती है जिसका मतलब यह होता है कि आपकी में रोज़ी-रोटी कमाने वाले हर सामान की पूजा होती है, चाही वो आपकी कलम ही क्यों न हो। घरों में इस दिन उन सभी चीजों की पूजा होती है जो आपके व्यवसाय या नौकरी-पेशे से जुड़े होते हैं।
आप जिस भी चीज से काम करते हैं, उसे साफ किया जाता है, हल्दी, कुमकुम और फूलों से सजाया जाता है और फिर उसकी पूजा की जाती है। जैसे फैक्ट्री में मशीनरी, वाहन, वाद्य यंत्र या रसोई के बर्तन सभी की पूजा करना शुभ माना जाता है। यही नहीं आज के समय में इस दिन आपके कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे लैपटॉप की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
दशहरा के दिन शस्त्र पूजा का महत्व
दशहरा के दिन वाहन और शस्त्र पूजा करने को व्यक्ति को विजय का आशीर्वाद मिलता है और हर काम में सफलता के योग बनते हैं। यही नहीं शस्त्र पूजा से शक्ति और साहस का भी संचार होता है।
अगर आप भी इस दिन शस्त्र पूजा करते हैं तो इसके शुभ फल मिलते हैं और जीवन में सफलता के योग बनते हैं। इस साल दशहरा का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा और इस दिन रावण दहन के साथ शस्त्रों की पूजा भी फलदायी होगी।
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