नई दिल्ली। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने चर्च की सुरक्षा और उन पर हमलों की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान गृहमंत्री ने साफ कर दिया कि धर्म के आधार पर किसी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चर्चों की सुरक्षा का उपाय सुझाने के लिए उन्होंने ईसाई समुदाय और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कमेटी बनाने का भरोसा दिया।

पिछले कुछ महीनों के भीतर दिल्ली में चर्चों में तोडफ़ोड़ की पांच घटनाओं के मद्देनजर ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उनका कहना था कि चर्चों पर हमलों की जांच में पुलिस कुछ नहीं कर रही है। राजनाथ ने प्रतिनिधिमंडल को इन सभी मामलों में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने और चर्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने एक संयुक्त कमेटी बनाने की घोषणा की, जिसमें ईसाई समुदाय और दिल्ली पुलिस के पांच-पांच प्रतिनिधि शामिल होंगे। ईसाई समुदाय की मांग को देखते हुए गृहमंत्री ने पुलिस को चर्च पर हमलों की एफआइआर में दंगा भड़काने के इरादे से उकसावे की कार्रवाई, धार्मिक भावना आहत करने आदि जैसे भारतीय दंड संहिता के कुछ कठोर प्रावधानों को शामिल करने का निर्देश दिया।

चर्चों पर हमले के विरोध में प्रदर्शन-

दिल्ली में चर्चों पर हो रहे हमलों के विरोध में ईसाई समुदाय के लोगों ने सेक्रेड हार्ट चर्च के सामने प्रदर्शन किया। दो महीने के भीतर पांच चर्चों को निशाना बनाने को साजिश करार दिया। उन्होंने पूरे मामले की जांच दिल्ली हाई कोर्ट की देखरेख में एसआइटी से कराने की मांग की है।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पादरी, नन, अल्पसंख्यक नेता व ईसाई समुदाय के लोग एकत्रित हुए। गृहमंत्री का आवास घेरने के लिए उन्होंने अशोक रोड पर बढऩे की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें गोल डाकखाना के नजदीक ही रोक लिया। इस दौरान दोनों पक्षों में हल्की झड़प भी हुई।

आर्कबिशप अनिल कोटो ने दिल्ली पुलिस की जांच को गुमराह करने वाला बताते हुए कहा कि पुलिस चर्च में आग की घटनाओं को शार्ट सर्किट और अराजकतत्वों के अंदर घुसने की घटना को सामान्य चोरी की घटना बता रही है। ईसाई धर्मस्थलों पर ये हमले सामान्य नहीं है, इसके पीछे बड़ी साजिश है। ईसाई समुदाय को अब दिल्ली पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।

Edited By: Preeti jha

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट