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द वन के गाने से चर्चा में आई छठ पूजा, जानिए कौन हैं छठी मैया और क्या है इस महापर्व का महत्व?

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:36 PM (IST)

सिद्धार्थ-तमन्ना के 'छठी मैया' गाने से चर्चा में आई छठ पूजा के महत्व और अनुष्ठानों को जानें। यह महापर्व संतान ...और पढ़ें

छठ पूजा का धार्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)

छठ पूजा का धार्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)  

HighLights

  1. छठ पूजा संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए।

  2. छठी मैया ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन।

  3. नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, सूर्योदय अर्घ्य प्रमुख अनुष्ठान।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। यह महापर्व 4 दिनों तक बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस व्रत को संतान की लंबी आयु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। इस पर्व के दौरान छठी मैया की पूजा-अर्चना करने का विशेष विधान है।

हाल ही में तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ मल्होत्रा की अपकमिंग फिल्म 'द वन' का 'छठी मैया' गीत रिलीज हुआ है, जो दर्शकों को बेहद पसंद आ रहा है। इसी वजह से लोगों के बीच छठ पूजा का महापर्व चर्चा में है। हर कोई छठ पूजा के बारे में जानना चाहता है, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कौन हैं छठी मैया और नहाय-खाय से लेकर सूर्योदय अर्घ्य तक का क्या महत्व है।

कौन हैं छठी मैया

पुराणों के अनुसार, छठी मैया को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री, देवसेना और भगवान सूर्य की बहन माना जाता है। छठ पूजा के दौरान विधिपूर्वक छठी मैया की पूजा-अर्चना होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान सुख, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार में खुशहाली का आगमन होता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान कड़े नियमों का पालन किया जाता है। छठी मैया का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है।

नहाय-खाय

छठ पूजा के पहले दिन व्रती नदी में स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन कद्दू की सब्जी, चने की दाल और भात का सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। इसका खास उद्देश्य यह होता है कि पूजा के लिए व्रती का शरीर और मन पूरी तरह शुद्ध हो जाए।

खरना

दूसरे दिन से छठ पूजा के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है। इस दिन शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़, चावल की खीर और रोटी बनाई जाती है। इसके बाद पूजा के दौरान छठी मैया को भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रती का 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

संध्या अर्घ्य

छठ पूजा के तीसरे दिन शाम को डूबते हुए सूर्य की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। इस दौरान बांस की टोकरी में पूजा का सामान रखकर घाट पर ले जाया जाता है। इसके बाद जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

सूर्योदय अर्घ्य

छठ पूजा के चौथे और अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। इस दिन व्रती उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान छठी मैया की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही, सूर्य देव और छठी मैया से संतान के उज्ज्वल भविष्य और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। अर्घ्य देने के बाद प्रसाद खाकर व्रत का पारण किया जाता है।

छठ पूजा 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

नहाय खाय (पहला दिन): 13 नवंबर
खरना (दूसरा दिन): 14 नवंबर
संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): 15 नवंबर
उषा अर्घ्य और पारण (अंतिम दिन): 16 नवंबर

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