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Shani Sade Sati: शनि दोष दूर करने के लिए रोज करें इन मंत्रों का जप, दूर होंगे सभी दुख एवं संकट

ज्योतिषियों की मानें तो शनिदव न्याय के देवता हैं। अच्छे कर्म करने वाले जातक को इच्छित फल देते हैं। वहीं बुरे कर्म करने वाले को शनिदेव (Shani Sade Sati) दंड देते हैं। वर्तमान समय में शनिदेव कुंभ में विराजमान हैं। इस राशि में शनिदेव 29 मार्च 2025 तक रहेंगे। शनिदेव 29 मार्च को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेंगे।

By Pravin KumarEdited By: Pravin KumarThu, 11 Jul 2024 03:34 PM (IST)
Shani Sade Sati: कब करेंगे शनिदेव राशि परिवर्तन?

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Shani Sade Sati: ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफल दाता कहा जाता है। व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार शनिदेव फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वाले लोगों को शुभ फल देते हैं। वहीं, बुरे कर्म करने वाले लोगों को दंडित करते हैं। ज्योतिषियों की मानें तो शनिदेव की कृपा बरसने पर सामान्य व्यक्ति भी अपने जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करता है। वहीं, शनिदेव की कुदृष्टि पड़ने पर जातक को जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। अगर आप भी शनि दोष से परेशान हैं, तो रोजाना पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

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शनि मंत्र

1. ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंय्यो रभिस्त्रवन्तु नः।।

2. ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्’

3. ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धदिभिर्युतम् |

अनिष्ट हर्त्ता गृहाणेदं भगवन शनि देवताः ||

4. ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”।

ऊँ शं शनैश्चराय नम:।।

ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः।।

5. ॐ नीलाजंन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

6. नीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |

चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी ||

7. ॐ भग्भवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो सौरी: प्रचोदयात।

8. अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।

दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।

गतं पापं गतं दु: खं गतं दारिद्रय मेव च।

आगता: सुख-संपत्ति पुण्योहं तव दर्शनात्।।

9. ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा।

कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।।

शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।

दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।।

10. भो शनिदेवः चन्दनं दिव्यं गन्धादय सुमनोहरम् |

विलेपन छायात्मजः चन्दनं प्रति गृहयन्ताम् ||

11. ॐ शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर |

अर्घ्यं च फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||

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डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/जयोतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेंगी।