नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क | Chanakya Niti: चाणक्य नीति को ज्ञान का सागर कहा गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आचार्य चाणक्य के इन नीतियों बहुत ही उपयोगी माना जाता है। बता दें कि आचार्य चाणक्य की गणना विश्व के श्रेष्ठतम विद्वानों में होती है। उनकी नीतियों का पालन करके ही मगध पर मौर्य वंश की स्थापना हुई थी और महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का उदय हुआ था। आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति का पाठन और श्रवन वर्तमान समय में भी लाखों युवाओं द्वारा किया जाता है। उन्होंने अपनी नीतियों में व्यवहार, धन, रणनीति व राजनीति के साथ-साथ वाणी को भी बहुत महत्व दिया है। चाणक्य नीति के इस भाग में आइए जानते हैं कि किस तरह कोयल बताती है मधुर वाणी का महत्व।

चाणक्य नीति से जानिए कैसे एक कोयल देती है जीवन का अमूल्य ज्ञान (Chanakya Niti in Hindi)

तावन्मौनेन नीयन्ते कोकिलश्चैव वासराः ।

यावत्सर्वं जनानन्ददायिनी वाङ्न प्रवर्तते ।।

अर्थात: एक कोयल तब तक मौन रहकर समय बिताती है, जब तक उसके कंठ से मधुर स्वर नहीं निकलते हैं। यही वाणी सबको प्रिय भी है। इसलिए जब भी बोलें तो मधुर बोलें। कड़वा बोलने से बेहतर मूक रहना ही एक अच्छा विकल्प है।

आचार्य चाणक्य इस नीति के माध्यम से कोयल का उदाहरण देते हुए बता रहे हैं कि व्यक्ति की वाणी का प्रभाव किस तरह से जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बताया है कि कोयल अपनी मधुरता के लिए पहचानी जाती है और उसकी आवाज सुनकर सभी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि जब तक कोयल अपनी प्रख्यात मधुर स्वर के लिए कंठ को तैयार नहीं कर लेती है, तब तक वह मौन अवस्था में होती है। इसी प्रकार मनुष्य को भी केवल मुख से मधुर वचनों का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि मधुरता से समाज में प्रेम बढ़ता है और सभी लोगों में सद्भाव की भावना उत्पन्न होती है। वहीं जिस व्यक्ति के कंठ से केवल कड़वाहट के स्वर निकलते हैं उन्हें हर स्थिति में शांत रहना चाहिए। क्योंकि इससे न केवल शत्रु बढ़ते हैं बल्कि समाज में भी व्यक्ति का स्तर नीचे हो जाता है। इसलिए कम बोलें, लेकिन मधुर वचनों का ही प्रयोग करें।

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Edited By: Shantanoo Mishra

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