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चाणक्य नीति के अनुसार इन 7 चीजों को पैर लगाना मतलब अपनी 'किस्मत' को लात मारना

Published: Mon, 30 Mar 2026 04:00 PM (IST)

क्या आप जानते हैं कि गाय और गुरु समेत 7 ऐसी चीजें हैं जिन्हें पैर लगाने से आपके सारे पुण्य ...और पढ़ें

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की नीतियां (Image Source: AI-Generated)

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की नीतियां (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जीवन में तरक्की और सुख-शांति के लिए सिर्फ कड़ी मेहनत ही काफी नहीं होती, बल्कि हमारे संस्कार और व्यवहार भी बहुत मायने रखते हैं। महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में कुछ ऐसी छोटी लेकिन गंभीर बातों का जिक्र किया है, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं।

चाणक्य नीति के अनुसार, कुछ खास चीजें और व्यक्ति ऐसे होते हैं जिन्हें पैर से छूना या लात मारना न केवल पाप है, बल्कि यह आपके दुर्भाग्य का कारण भी बन सकता है।

आचार्य चाणक्य के अनुसार, हमारी संस्कृति में 'पैर' का स्पर्श सम्मान और अपमान दोनों का प्रतीक है। जहां बड़ों के पैर छूकर हम आशीर्वाद लेते हैं, वहीं कुछ पवित्र चीजों को पैर लगाना पाप और नकारात्मकता (Negativity) का कारण बनता है।

किन चीजों को पैर लगाना है वर्जित?

अग्नि (आग): हिंदू धर्म में अग्नि को देवता माना गया है। घर का चूल्हा हो या पूजा का दीपक, अग्नि को पैर से छूना या उसके ऊपर से गुजरना घोर अपमान माना जाता है। आध्यात्मिक रूप से यह आपके द्वारा किए गए पुण्य को नष्ट कर सकता है।

गुरु और ब्राह्मण: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो हमें ज्ञान देता है, वह ईश्वर के समान है। गुरु या किसी ज्ञानी ब्राह्मण को पैर लगाना आपके बौद्धिक पतन का कारण बन सकता है। अगर अनजाने में ऐसा हो जाए, तो तुरंत हाथ जोड़कर क्षमा मांगनी चाहिए।

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(Image Source: Ai-Generated)

गौ माता (गाय): भारतीय संस्कृति में गाय को 'माता' का दर्जा दिया गया है, जिनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। गाय को लात मारना या पैर से छूना आपके जीवन में दरिद्रता ला सकता है।

कुंवारी कन्या और छोटे बच्चे: कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है और छोटे बच्चे निष्पाप होते हैं। इन्हें पैर लगाना साक्षात् लक्ष्मी जी को नाराज करने जैसा है। चाणक्य नीति के अनुसार, बच्चों के प्रति हमेशा स्नेह और सम्मान का भाव रखना चाहिए।

बड़े-बुजुर्ग: अपने से बड़ों को पैर लगाना संस्कारों के विरुद्ध है। चाणक्य का मानना था कि जिस घर में बुजुर्गों का अपमान होता है, वहां शांति कभी नहीं टिकती।

क्या कहते हैं शास्त्र

आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति के सातवें अध्याय के छठे श्लोक में स्पष्ट रूप से इसका बात का उल्लेख किया है:

'अग्निं गुरुं ब्राह्मणं च गां कुमारीं च वृद्धकम्।
शिशुं च नैव स्प्रष्टव्यं पादाभ्यां कथंचन ॥'

इसका सीधा अर्थ यही है कि अग्नि, गुरु, ब्राह्मण, गाय, कुमारी कन्या, वृद्ध और शिशु को कभी भी पैर से नहीं छूना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।