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Chaitra Navratri 2026 Day 2: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में जरूर करें ये आरती और पाएं कृपा

Published: Fri, 20 Mar 2026 06:30 AM (IST)Updated: Fri, 20 Mar 2026 08:18 AM (IST)

चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन आदिशक्ति के ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini Puja) स्वरूप की पूजा की जाती है।

Maa Brahmacharini Aarti (AI Generated Image)

Maa Brahmacharini Aarti (AI Generated Image)

HighLights

  1. नवरात्र के दूसरे दिन की जाती है ब्रह्मचारिणी की पूजा

  2. ज्ञान, त्याग और संयम की प्रतीक हैं माता का यह स्वरूप

  3. व्रत करने से मिलता है ज्ञान, आत्मविश्वास का आशीर्वाद

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, ज्ञान, त्याग और संयम की प्रतीक हैं। (Chaitra Navratri 2026) देवी की आराधना से साधक को ज्ञान, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान माना की आरती भी जरूर करें, ताकि आपको पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति हो सके।

कैसा है माता का स्वरूप

'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली माता। माता ब्रह्मचारिणी अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी हैं। स्वरूप की बात की जाए, तो माता श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं।

माता के एक हाथ में जपमाला (अक्षमाला) और दूसरे में कमंडल है जो उनके तपस्यापूर्ण जीवन और शुद्धता का प्रतीक है। पार्वती के रूप में उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti Lyrics)

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।

Brahmacharini I

(Picture Credit: Freepik)

मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र -

1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।

2. ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।

3. स्तुति मंत्र -

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

4. ध्यान मंत्र -

दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

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