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Chaitra Navratri 2023: महादेव के लिए पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री ने दी थी आहुति, जानें-कथा और धार्मिक महत्व

Chaitra Navratri 2023 इस वर्ष 22 मार्च से लेकर 30 मार्च तक चैत्र नवरात्रि है। आज घटस्थापना है। इस दिन मां दुर्गा की प्रथम स्वरूपा मां शैलपुत्री की पूजा और उपासना की जाती है। शैलपुत्री की विधि पूर्वक पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

By Pravin KumarEdited By: Pravin KumarPublished: Wed, 22 Mar 2023 11:14 AM (IST)Updated: Wed, 22 Mar 2023 11:14 AM (IST)
Chaitra Navratri 2023: महादेव के लिए पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री ने दी थी आहुति, जानें-कथा और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क | Chaitra Navratri 2023: हिंदी पंचांग के अनुसार, वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं। चैत्र माह में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष 22 मार्च से लेकर 30 मार्च तक चैत्र नवरात्रि है। आज घटस्थापना है। इस दिन आदिशक्ति मां दुर्गा की प्रथम स्वरूपा मां शैलपुत्री की पूजा और उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की विधि पूर्वक पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सनातन शास्त्रों में मां शैलपुत्री का महिमामंडन किया गया है। साथ ही उनकी उत्पत्ति की कथा भी निहित है। आइए, मां शैलपुत्री की उत्पत्ति की कथा जानते हैं-

कैसे हुई मां शैलपुत्री की उत्पत्ति ?

चिरकाल में प्रजापति दक्ष ने मां की कठिन तपस्या कर आदिशक्ति को पुत्री रूप में प्राप्त करने का वरदान मांगा। मां दुर्गा तपस्या से प्रसन्न होकर प्रजापति को उनके गृह जन्म लेने का वरदान दिया। कालांतर में प्रजापति दक्ष के घर आदिशक्ति मां दुर्गा ने सती रूप में जन्म लिया। हालांकि, भूमण्डल में आने के पश्चात मां सती सबकुछ भूल गई। एक रात स्वप्न में उनके शिव जी आए और उन्होंने आदिशक्ति मां जगदंबा को सबकुछ याद दिलाया।

तत्पश्चात, मां सती शिव जी की पूजा-उपासना करने लगी। जब मां सती विवाह योग्य हुई, तो प्रजापति दक्ष विवाह हेतु वर ढूंढने लगे। इस दौरान मां सती शिव जी को अपना वर मान चुकी थी। उनकी पसंद को प्रजापति दक्ष ने ठुकरा दिया। किन्तु सती नहीं मानी। तब मां सती की शादी भगवान शिव से हुई। मां सती के इस कार्य से प्रजापति दक्ष प्रसन्न नहीं थे। समय के साथ पिता और पुत्री में दूरियां बढ़ती गई।

कुछ समय पश्चात, एक बार प्रजापति दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन किया। इसमें मां सती और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। मां सती को यज्ञ को जानकारी हुई, तो जाने की जिद करने लगीं।

भगवान शिव ने कहा-हे देवी! इस यज्ञ में समस्त लोकों को आमंत्रित किया गया है, किन्तु केवल आपको आमंत्रित नहीं किया गया है। इसका तात्पर्य यह है कि जाने के बाद भी आपको सम्मान नहीं मिलेगा। आपके लिए उत्तम होगा कि आप न जाएं। इसके बावजूद मां सती नहीं मानी और शिव जी की सहमति से यज्ञ में शामिल हुईं।

यज्ञ में किसी ने उनका आदर-सत्कार नहीं किया। साथ ही शिव जी को शब्दों से अपमानित भी किया। उस समय मां को आभास हुआ कि उन्होंने आकर गलती कर दी। तत्क्षण मां ने यज्ञ वेदी में अपनी आहुति दे दी। कालांतर में मां सती शैलराज हिमालय के घर जन्म लीं। अतः इन्हें मां शैलपुत्री कहा जाता है।

डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।


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