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बुद्ध पूर्णिमा की रात दक्षिण दिशा में क्यों जलाना चाहिए दीपक? पितृ दोष से मुक्ति का सबसे सरल तरीका

Published: Thu, 23 Apr 2026 02:05 PM (IST)

बुद्ध पूर्णिमा का दिन केवल दान-पुण्य के लिए ही नहीं, बल्कि पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी अत्यंत शुभ ...और पढ़ें

बुद्ध पूर्णिमा 2026 पर करें ये उपाय

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में वैशाख पूर्णिमा यानी बुद्ध पूर्णिमा को केवल दान-पुण्य का दिन ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का महापर्व भी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस पावन रात को घर की दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाना बेहद लाभकारी होता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का असली कारण क्या है?

आइए जानते हैं बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima 2026) की रात दीप दान का महत्व और पितृ दोष से मुक्ति का सबसे आसान तरीका।

दक्षिण दिशा में ही क्यों जलाते हैं दीपक?

धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा को 'पितरों की दिशा' माना गया है। यमराज का वास भी इसी दिशा में होता है। बुद्ध पूर्णिमा की रात जब चंद्रमा अपनी पूरी कलाओं के साथ आकाश में होता है, तब दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से:

पितरों का मार्ग प्रशस्त होता है: माना जाता है कि यह दीपक पूर्वजों की आत्मा को शांति और प्रकाश प्रदान करता है।

क्षमा प्रार्थना: इस रात दीपक जलाकर पितरों से अपनी गलतियों की माफी मांगना उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है।

नकारात्मकता का नाश: घर के दक्षिण कोने में जलता हुआ सरसों के तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) को खत्म कर उन्नति के द्वार खोलता है।

पितृ दोष से मुक्ति का सबसे सरल उपाय

अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है या घर में बिना वजह कलह रहती है, तो बुद्ध पूर्णिमा की रात यह विशेष विधि जरूर अपनाएं:

  • शाम के समय एक मिट्टी के दीपक में सरसों या तिल का तेल डालें। उसमें थोड़े काले तिल डालें और उसे घर के दक्षिण दिशा वाले कोने में या आंगन के दक्षिणी हिस्से में जलाएं। ध्यान रहे कि दीपक की लौ (ज्योति) भी दक्षिण दिशा की ओर ही होनी चाहिए।
  • बुद्ध पूर्णिमा पर दिन के समय पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और उसकी सात परिक्रमा करें। पीपल में भगवान विष्णु और पितरों का वास माना जाता है, इसलिए यह उपाय पितृ दोष को जड़ से खत्म करने की शक्ति रखता है।
  • इस दिन गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराना न भूलें। शास्त्र कहते हैं कि इन जीवों द्वारा ग्रहण किया गया भोजन सीधे हमारे पूर्वजों को तृप्ति देता है।
  • दीपक जलाते समय 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र का जप करें। यह मंत्र पितरों के प्रति आपकी श्रद्धा को व्यक्त करता है।

क्या होगा लाभ?

बुद्ध पूर्णिमा पर किया गया यह छोटा सा 'दीप दान' आपके जीवन से आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति और संतान प्राप्ति में आ रही बाधाओं को दूर कर सकता है। जब पितृ प्रसन्न होते हैं, तो घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।

तो इस बुद्ध पूर्णिमा, दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाकर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें!

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।