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ब्रह्म मुहूर्त, संध्या काल या रात्रि, सुंदरकांड का पाठ किस समय करने से तुरंत मिलता है फल?

Published: Thu, 24 Sep 2026 07:15 PM (IST)

सुंदरकांड का पाठ करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त और शाम का समय सबसे शुभ माना गया है। मंगलवार और शनिवार ...और पढ़ें

सुंदरकांड पाठ के लिए सबसे शुभ समय (Picture Credit: AI Generated)

सुंदरकांड पाठ के लिए सबसे शुभ समय (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) अकेले पाठ के लिए उत्तम।

  2. सामूहिक पाठ के लिए शाम का समय (सूर्यास्त) शुभ।

  3. मंगलवार और शनिवार को पाठ से विशेष लाभ मिलता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं में से हनुमान जी को चिरंजीवी बताया गया है, जिसका मतलब यह है कि वो आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। मान्यता है कि कलियुग में भी हनुमान जी अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते हैं और जब भक्त सच्चे मन से कुछ भी मांगता है तो उसकी इच्छा जल्दी से जल्दी पूरी करते हैं।

यही नहीं हनुमान जी अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न भी हो जाते हैं। लोग उन्हें प्रसन्न करने के लिए सुंदरकांड का पाठ करते हैं। यह रामायण का एक ऐसा हिस्सा है जिसमें हनुमान जी की महिमा के बारे में बताया गया है और इसे पढ़ने से भक्तों के ऊपर बजरंगबली की विशेष कृपा होती है।

इसका पाठ करने के लुक नियम बनाए गए हैं जिनका पालन बहुत जरूरी होता है। उन्हीं नियमों में एक यह भी है कि सुंदरकांड का पाठ अगर आप एक शुभ समय में करते हैं, तो उसका फल बहुत अच्छा होता है। आइए आपको बताते हैं ये पाठ करने का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा है?

ब्रह्म मुहूर्त में करें सुंदरकांड का पाठ

अगर आप अकेले में सुंदरकांड का पाठ करना चाहते हैं, तो इसके लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। अगर आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में, यानी 4 से 6 बजे के बीच शांति के वातावण में सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो इस पाठ में ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। यह पाठ वैसे तो आप किसी भी दिन कर सकते हैं, लेकिन इसे अगर मंगलवार और शनिवार के दिन करें, तो इसके ज्यादा शुभ फल मिलते हैं।

सुंदरकांड पढ़ने का सबसे शुभ समय कौन सा है?

ऐसा माना जाता है कि अगर आप घर में सुंदरकांड पढ़ रही हैं, तो ब्रह्म मुहूर्त यानी कि प्रातः काल का मुहूर्त सबसे अच्छा माना जाता है। वहीं अगर आप पाठ समूह में करना चाहते हैं, तो आप इसे शाम के समय 4 बजे के बाद आरंभ करें।

सूर्यास्त के आस-पास का समय इसके पाठ के लिए बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय लोग आध्यात्मिक शक्तियों में लीन होकर ईश्वर का ध्यान लगाते हैं और एक शांत वातावरण में सामूहिक रूप से पाठ करना शुभ होता है। इसी वजह से सुंदरकांड को शाम के समय करना सबसे शुभ होता है।

सुंदरकांड का पाठ करने के सबसे शुभ दिन

आप यह पाठ प्रत्येक मंगलवार, शनिवार, किसी भी पूर्णिमा तिथि पर, हनुमान जयंती, अमावस्या तिथि पर कर सकते हैं। इसके अलावा आप किसी भी दिन एक शांत वातावण में सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं।

ज्योतिष में मान्यता यह भी है कि अगर आप लगातार 21 दिनों तक सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो इसके अत्यंत शुभ फल मिलते हैं। इसके लिए आप एक शांत वातावण में हनुमान जी की प्रतिमा को सामने रखकर पाठ कर सकते हैं।

अगर आप नियम पूर्वक सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो इसके विशेष शुभ फल मिलते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।