रामसेतु बनाने से पहले प्रभु श्री राम ने किसकी पूजा की थी? पढ़ें रामायण में छिपा रहस्य
त्रेता युग में भगवान राम ने रामसेतु के निर्माण से पहले रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर भगवान शिव की आराधना ...और पढ़ें

रामसेतु निर्माण से पहले प्रभु श्री राम ने की थी शिव पूजा (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भी बात त्रेता-युग की आती है प्रभु श्री राम का नाम सामने आता है। भगवान विष्णु ने पृथ्वी के संचालन के लिए रामचंद्र के रूप में अवतार लिया। उनका उद्देश्य पुण्यात्माओं का उद्धार करना और दुष्टों का विनाश करना था।
रामायण ग्रंथ में राम की महिमा का वर्णन विस्तार से मिलता है। यही नहीं उनके गुणों और कार्यों का गुणगान उनके भक्त सदियों से करते चले आ रहे हैं और उनकी महिमा का आनंद उठाते हैं।
रामायण में ही एक प्रसंग है जिसमें रामेश्वरम में ज्योतिर्लिंग और राम सेतु के निर्माण की गाथा है। आइए आपको बताते हैं राम सेतु के निर्माण से पहले प्रभु श्री राम ने किसकी आराधना की और कैसे हुआ इस पवित्र सेतु का निर्माण?
राम सेतु के निर्माण से पहले श्री राम ने किसकी आराधना की?
जब भगवान राम राम-सेतु का निर्माण करने जा रहे थे, उस समय उन्हें किसी ब्राह्मण की आवश्यकता थी। जिनकी मदद से सेतु का निर्माण पूर्ण हो सकता था। श्री राम का सेतु निर्माण का मुख्य उद्देश्य ही लंका तक पहुंचना और माता सीता को रावण से मुक्ति दिलाना था।
इसी वजह से वो सेतु निर्माण से पहले शिवलिंग की स्थापना करना चाहते थे जिससे शिव पूजन से सेतु निर्माण का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो सके। श्रीराम ने रामेश्वरम में राम सेतु के निर्माण से पहले शिवलिंग की स्थापना की उसी शिवलिंग की पूजा विधिपूर्वक की। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना भी की कि इस युद्ध में धर्म और सत्य की विजय हो।
राम सेतु के निर्माण का रामायण में वर्णन
रामायण में एक चौपाई है जिसमें प्रभु श्री राम ने शिव जी की महिमा का वार्ना करते हुए बताया है-
सिव समान प्रिय मोहि न दूजा॥सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा॥संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी॥
इसका अर्थ यह हुआ कि- शिव के समान मुझे कोई और प्रिय नहीं है, जो व्यक्ति शिव विरोधी होकर मेरा भक्त बनना चाहेगा वो स्वप्न में भी मुझे प्राप्त नहीं कर सकता है। जो व्यक्ति महादेव से विमुख होकर मेरी भक्ति करेगा वह मूर्ख बुद्धि वाला नर्क में जाएगा। यह चौपाई श्री राम की भगवान शिव के प्रति भक्ति को दिखाती है।
रामायण के अनुसार रामसेतु का निर्माण कैसे हुआ
रामेश्वर में भगवान शिव की पूजा के बाद नल और नील ने वानर सेना के साथ मिलकर समुद्र पर पत्थरों से रामसेतु का निर्माण किया। उस समय यहां समुद्र में जो भी पत्थर डाले गए उसमें राम का नाम लिखा गया, क्योंकि राम नाम के पत्थर डूब नहीं सकते थे। इसी सेतु से श्री राम लंका पहुंचे और उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त करके सीता को मुक्ति दिलाई। रामायण में राम सेतु के निर्माण के लिए एक चौपाई मिलती है-
बाँध्यो सेतु नील नल नागर।राम कृपाँ जस भयउ उजागर॥जहँ तहँ देखि कपिन कै भीरा।रावन हृदयँ भई अति पीरा
इसका मतलब यह है कि- नल और नील ने समुद्र पर सेतु बांधा है। श्री रामजी की कृपा से उनका याच चारों दिशाओं में उजागर हो गया है। वानरों की भीड़ को जहां-तहां देखकर रावण के हृदय में बड़ी पीड़ा होने लगी है। यह चौपाई राम सेतु के निर्माण की गाथा को बताती है।
प्रभु श्री राम हमेशा से ही शिव जी के उपासक थे और राम सेतु के निर्माण से पूर्ण उनका शिवलिंग की स्थापना करके शिव जी का पूजन करना इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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