विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिना घंटी के होती है वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में आरती, अनोखी परंपरा के पीछे छिपी है खास वजह

By Samvida TiwariEdited By: Harshita Saxena
Published: Wed, 24 Jun 2026 05:42 PM (IST)

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में आरती के दौरान घंटियां न बजाने और मूर्ति के सामने पर्दा डालने की अनोखी ...और पढ़ें

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की अनोखी परंपराएं (Picture Credit- Instagram)

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की अनोखी परंपराएं (Picture Credit- Instagram)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश में हजारों की संख्या में मंदिर हैं और हर एक का अपना कोई रहस्य या कहानी है। न जाने कितने ऐसे मंदिर हैं जो किसी अनोखे रहस्य को खुद में समेटे हुए सदियों से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इन्हीं में से एक है वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरा करने वाला माना जाता है।

भगवान कृष्ण के बाल अवतार की कई कथाएं प्रचलित हैं और उन्हें अत्यंत पूजनीय माना जाता है। श्री कृष्ण की बाल लीलाओं में चाहे उनका चंचल स्वभाव हो, गोवर्धन पर्वत उठाना हो, गोपियों के साथ रास रचाना हो या फिर माखन चुराना हो, इन सभी की अलग कहानी है। श्री कृष्ण के बाल काल की लीलाओं की वजह से ही वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर अत्यंत खास माना जाता है। श्री कृष्ण ने अपना शुरुआती जीवन वृंदावन में ही बिताया था। आइए आपको बताते हैं बांके बिहारी मंदिर के एक ऐसे रहस्य के बारे में जिसमें ये बताया जाता है कि आज भी इस  मंदिर में आरती के समय नहीं बजाई जाती हैं घंटियां। 

बांके बिहारी मंदिर में घंटी बजाने की मनाही क्यों है?

बांके बिहारी मंदिर की इस अनोखी परंपरा के रूप में ऐसा कहा जाता है कि यहां श्री कृष्ण का बाल रूप विराजमान है और यदि कोई छोटा बच्चा सो रहा हो और उसके आस-पास घंटियां बजाई जाएं तो उसकी नींद खराब हो सकती है। इसी वजह से आरती के दौरान घंटियां बजाने से मना किया जाता है। यहां मौजूद भक्तों से लेकर पुजारियों तक सभी श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं और उनके सम्मान में घंटियां नहीं बजाते हैं जिससे उनकी नींद में कोई बाधा न आए। 

वहां सभी कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे बच्चे के रूप में देखते हैं जिसे देखभाल और शांति की जरूरत होती है जिससे उनके आराम में बाधा न आए। यहां के पुजारी हमेशा मंदिर परिसर में ऐसा माहौल बनाते हैं जैसे किसी छोटे बच्चे को आराम दिया जा रहा हो। 

बांके बिहारी मंदिर की एक अन्य अनोखी परंपरा 

बांके बिहारी मंदिर की एक और अनोखी परंपरा यह है कि यहां कुछ सेकंड के बाद मूर्ति के सामने पर्दा डाला जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अगर कोई व्यक्ति कुछ देर तक श्रीकृष्ण की मूर्ति की आंखों में एकटक देखता है, तो वह भक्त के वशीभूत होकर उसके साथ ही चले जाते हैं।

मंदिर में कुछ सेकंड के बाद ही पर्दा डालकर, पुजारी यह सुनिश्चित करते हैं कि भक्त कृष्ण की मौजूदगी से बहुत ज्यादा भावुक न हों और भगवान कृष्ण भी उनके साथ जाने के लिए सम्मोहित न हो जाएं।वास्तव में इस मंदिर से जुड़े ये रहस्य भक्तों को ओर आकर्षित करते हैं और मंदिर की भव्यता को और बढ़ाते हैं।

यह भी पढ़ें- भारत का एक ऐसा अनोखा मंदिर; जहां एक ही मूर्ति में दिखते हैं आधे गणेश और आधे हनुमान!

यह भी पढ़ें- जानिए केरल के उस अनोखे शिव मंदिर के बारे में, जो साल में सिर्फ एक महीने के लिए खुलता है

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।