सावन में नहाते समय पानी में मिलाएं बस ये 4 चीजें, हमेशा के लिए दूर हो जाएगी दरिद्रता
सावन में महादेव की कृपा पाने और दरिद्रता दूर करने के लिए स्नान के जल में गंगाजल, काले तिल, कच्चा ...और पढ़ें

सावन स्नान के नियम (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सावन का अधिक महत्व है। यह पवित्र महीना महादेव की कृपा प्राप्त और पूजा-अर्चना करने के लिए अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में भगवान का अभिषेक करने से भक्त के जीवन में आने वाले सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। साथ ही महादेव प्रसन्न होते हैं।
सावन में पूजा करने से पहले जल में कुछ विशेष चीजों को मिलकर स्नान करना चाहिए। इससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है। साथ ही दरिद्रता का नाश होता है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि सावन में किन चीजों को जल में मिलाकर स्नान करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। चलिए इस लेख में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

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गंगाजल- भगवान शिव का गंगाजल से अधिक गहरा नाता है। महादेव ने अपनी जटाओं में मां गंगा को धारण किया है। इसलिए सावन के महीने में जल में गंगाजल मिलकर स्नान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है। साथ ही व्यक्ति का मन और शरीर पवित्र होता है।
काले तिल- अमावस्या और श्राद्ध में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तिल का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा पानी में थोड़े से काले तिल मिलाकर स्नान करना लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल में काले तिल मिलाकर स्नान करने से जीवन की बाधाओं को दूर करने में फलदायी माना जाता है।
कच्चा दूध- भगवान शिव पर कच्चा दूध अर्पित करने का अधिक महत्व है। इससे महादेव की कृपा से जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए जल में कच्चा दूध मिलाकर स्नान करें। ऐसा माना जाता है कि पानी में कच्चा दूध मिलाने से व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।
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गुलाब जल- सावन में नाहने के पानी में गुलाब जल मिलाकर स्नान करने से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
ध्यान रखें ये खास बातें
- सावन में ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। दिन की शुरुआत देवी-देवताओं के ध्यान करें।
- स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- इसके बाद मंदिर में शिव पूजन करें।
- शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र और धतूरा आदि को अर्पित करें।
- फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
