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ज्येष्ठ माह में क्यों मनाया जाता है 'बड़ा मंगल'? पढ़ें बुढ़वा मंगल की पौराणिक कथा और महत्व

Published: Thu, 23 Apr 2026 11:13 AM (GMT+05:30)

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार का विशेष महत्व है, जिसे बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। जानें राम-हनुमान मिलन की कथा इसका महत्व।

यहां पढ़ें बड़े मंगल का महत्व (Image Source: AI-Generated)

यहां पढ़ें बड़े मंगल का महत्व (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (जेठ) महीने में पड़ने वाले मंगलवार का महत्व कई गुना अधिक माना गया है। इन्हें 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। इन खास दिनों में बजरंगबली के वृद्ध स्वरूप की पूजा करने का विधान है। भक्त इस दिन मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं और जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन किया जाता है।

बड़े मंगल की पौराणिक कथा और महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन ही प्रभु श्रीराम और बजरंगबली का पहली बार मिलन हुआ था। इसी पावन संयोग के कारण इस माह के हर मंगलवार का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि बुढ़वा मंगल के दिन भगवान राम और हनुमान जी की उपासना करने से भक्तों को दोनों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस दिन की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।

Bada-Mangal

(Image Source: AI-Generated)

बड़ा मंगल 2026 की डेट्स (Bada Mangal 2026 Date List)

साल 2026 में ज्येष्ठ माह के दौरान कुल 8 बड़े मंगल पड़ेंगे। इनकी तिथियां इस प्रकार हैं:

प्रथम बड़ा मंगल - 5 मई 2026

द्वितीय बड़ा मंगल - 12 मई 2026

तृतीय बड़ा मंगल - 19 मई 2026

चतुर्थ बड़ा मंगल - 26 मई 2026 (कैलेंडर के अनुसार)

पंचम बड़ा मंगल - 2 जून 2026

छठा बड़ा मंगल - 9 जून 2026

सातवां बड़ा मंगल - 16 जून 2026

आठवां बड़ा मंगल - 23 जून 2026

सेवा और उपासना का दिन

श्रद्धा और उपासना का पावन दिन ज्येष्ठ माह के 'बड़े मंगल' पर हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दिन पवनपुत्र को सिंदूर और चोला अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना भक्तों के लिए विशेष फलदायी और मानसिक शांति देने वाला माना जाता है।

निस्वार्थ सेवा की अनूठी परंपरा यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा का एक जीवंत उदाहरण है। जगह-जगह आयोजित होने वाले विशाल भंडारे इस दिन की पहचान हैं, जहां समाज का हर वर्ग एक साथ मिलकर प्रसाद ग्रहण करता है।

भाईचारे का प्रतीक

भाईचारे और एकता का प्रतीक बड़े मंगल का यह उत्सव भगवान हनुमान के प्रति अटूट आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी संदेश देता है। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और पवित्रता के साथ जीवित है, जो लोगों के दिलों को आपस में जोड़ने का काम करती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।