अनंत चतुर्दशी 2026: सूत या रेशम? भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए किस धागे से बनाएं अनंत सूत्र?
हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है, जिस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस अवसर ...और पढ़ें

अनंत सूत्र के नियम (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
अनंत सूत्र सूती या रेशमी धागे से बनाना शुभ माना जाता है।
अनंत सूत्र बांधने से पहले भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी के पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2026) आज यानी 25 सितंबर को मनाई जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीहरि की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। इस अवसर पर पूजा के बाद कलाई पर 14 गांठों वाला पवित्र अनंत सूत्र बांधा जाता है।
ये 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा निर्मित 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अनंत चतुर्दशी के दिन सूत या रेशम, किस धागे से अनंत सूत्र बनाना चाहिए? ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
किस धागे से बनाना चाहिए अनंत सूत्र?
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए हाथ में अनंत सूत्र बांधा जाता है। इस दिन शुभ फल की प्राप्ति के लिए सूती या रेशमी धागे से अनंत सूत्र बनाया जा सकता है। मान्यताओं के अनुसार, अनंत सूत्र बनाने के लिए ये दोनों ही धागे पवित्र माने जाते हैं।
अनंत सूत्र के नियम
- अनंत सूत्र बनाने के लिए धागे को हल्दी या कुमकुम से रंगा हुआ होना चाहिए।
- एक बात का विशेष ध्यान रखें कि अनंत सूत्र काले धागे से न बनाएं, क्योंकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसलिए अनंत सूत्र बांधते समय रंग का विशेष ध्यान रखें।
- शास्त्रों के अनुसार, पुरुषों को अनंत सूत्र अपने सीधे हाथ की कलाई पर और महिलाओं को उल्टे हाथ की कलाई पर बांधना चाहिए।
- अनंत सूत्र को हाथ में बांधने से पहले इसे जगत के पालनहार भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। इस पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर इसकी पूजा करें। इसके बाद ही अनंत सूत्र को हाथ में बांधें।
- अनंत सूत्र को 14 दिनों तक हाथ में बांधकर रखने का विधान है। 14 दिन पूरे होने के बाद इसे हाथ से उतारकर किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या फिर इसे तुलसी या पीपल के पेड़ के पास रख दें।
- जिस दिन अनंत सूत्र धारण करें, उस दिन व्रत रखना चाहिए या फिर पूर्ण रूप से सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
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