विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अक्षय तृतीया पर पौराणिक रहस्य: परशुराम अवतरण से लेकर सतयुग की शुरुआत तक पूरी कहानी

Published: Sun, 19 Apr 2026 12:08 AM (IST)

इस वर्ष 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र और युगादि तिथि के विशेष संयोग में मनाई जाएगी। इस दिन ...और पढ़ें

अक्षय तृतीया 2026: रोहिणी नक्षत्र में बना दुर्लभ संयोग, जानें क्यों मिलेगा अक्षय फल

अक्षय तृतीया 2026: रोहिणी नक्षत्र में बना दुर्लभ संयोग, जानें क्यों मिलेगा अक्षय फल

HighLights

  1. 20 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र में अक्षय तृतीया का महापर्व।

  2. परशुराम अवतरण, सतयुग प्रारंभ; दान-पुण्य का विशेष महत्व।

  3. अबूझ मुहूर्त में शुभ कार्य, हल्के सोने के आभूषणों की मांग।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। अक्षय तृतीया का पावन महापर्व इस वर्ष 20 अप्रैल को उदया तिथि में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग और युगादि तिथि के कारण इस बार इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस तिथि पर किए गए पुण्य कर्मों का फल कभी क्षय नहीं होता, इसलिए इसे “अक्षय तृतीया” कहा जाता है।

पौराणिक मान्यताओं का महत्व

तिलकामांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा के अनुसार, इसी पावन दिन सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि पर भगवान परशुराम और नर-नारायण के अवतरण की भी परंपरा जुड़ी हुई है। इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं और बांके बिहारी मंदिर में चरण दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है, जिससे इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

दान-पुण्य और स्नान का विशेष महत्व

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस दिन गंगा स्नान, पिंडदान और अन्न-वस्त्र दान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से समस्त पापों का क्षय होता है और पुण्य अक्षय बना रहता है। श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत-उपवास रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। देशभर में मंदिरों और पवित्र नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

अबूझ मुहूर्त में शुभ कार्यों की परंपरा


अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध और अबूझ मुहूर्त माना गया है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति क्रय-विक्रय जैसे मांगलिक कार्य इस दिन विशेष रूप से किए जाते हैं। यही कारण है कि पूरे देश में इस दिन विवाह समारोहों और अन्य शुभ आयोजनों की परंपरा व्यापक रूप से देखने को मिलती है।

बाजार में सोने की बदलती तस्वीर

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सोने की बढ़ती कीमतों का सीधा असर बाजार पर दिखाई दे रहा है। भारी आभूषणों की जगह अब हल्के वजन की चेन, आधुनिक डिजाइन वाले मंगलसूत्र और स्टाइलिश ईयररिंग्स की मांग बढ़ी है। खासकर युवाओं में 9 से 18 कैरेट की हल्की और आकर्षक ज्वेलरी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह कम बजट में फैशनेबल विकल्प उपलब्ध कराते हुए ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।

आस्था और आधुनिकता का संगम


अक्षय तृतीया का यह पर्व एक ओर जहां धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली और बाजार के नए ट्रेंड भी इसे प्रभावित कर रहे हैं। श्रद्धालु जहां पुण्य अर्जन में लगे हैं, वहीं बाजारों में रौनक और खरीदारी का उत्साह इस पर्व को और भी विशेष बना रहा है।