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आज का पंचांग 5 नवंबर: रमा एकादशी पर बन रहे हैं कई शुभ मुहूर्त, राहुकाल समेत यहां लें पूरी जानकारी

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:00 AM (IST)

आज 5 नवंबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के साथ रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा, ...और पढ़ें

5 नवंबर का पंचांग: रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी पर जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

5 नवंबर का पंचांग: रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी पर जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

HighLights

  1. आज 5 नवंबर को रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

  2. गोवत्स द्वादशी पर गाय और बछड़े की पूजा का विधान।

  3. पंचांग में शुभ-अशुभ मुहूर्त और नक्षत्र की जानकारी।

आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। आज गुरुवार का दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुरू होगा। इस दिन उदया तिथि के अनुसार रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा और कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं। वहीं, तिथि परिवर्तन के बाद द्वादशी का आरंभ होगा।

इस दिन गोवत्स द्वादशी का पर्व भी मनाया जाएगा, जिसमें गाय और बछड़े की पूजा करने का विधान है। ऐसे में अगर आप कोई शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो दिन का अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल जानना आपके लिए जरूरी है। आइए जानते हैं क्या कहता है आज का पंचांग।

तिथि: कृष्ण पक्ष की एकादशी – प्रातः 10 बजकर 35 मिनट तक, फिर द्वादशी तिथि
योग: वैधृति – अगले दिन तड़के 05 बजकर 09 मिनट (6 नवंबर) तक, फिर विष्कुंभ
करण: बालव – प्रातः 10 बजाकर 35 मिनट तक
करण: कौलव – रात्रि 10 बजकर 30 मिनट तक, फिर तैतिल

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 36 मिनट
सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 33 मिनट
चंद्रोदय का समय: अगले दिन तड़के 03 बजकर 45 मिनट (6 नवंबर)
चंद्रास्त का समय: दोपहर 03 बजकर 01 मिनट

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: तुला राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: सिंह राशि में (प्रातः 09 बजाकर 34 मिनट तक), फिर कन्या राशि में प्रवेश

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक
अमृत काल: रात्रि 08 बजकर 36 मिनट से रात्रि 10 बजकर 13 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 27 मिनट से दोपहर 02 बजकर 49 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 20 मिनट से प्रातः 10 बजकर 42 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 06 बजकर 36 मिनट से प्रातः 07 बजकर 58 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र: अगले दिन तड़के 03 बजाकर 55 मिनट (6 नवंबर) तक, फिर हस्त
नक्षत्र स्वामी: सूर्यदेव
राशि स्वामी: सूर्यदेव और बुधदेव
देवता: अर्यमा (मित्रता और एकजुटता के देवता)
प्रतीक: बिस्तर
सामान्य विशेषताएं: विनम्र, मेहनती, बेहतरीन वक्ता, बुद्धिमान, भरोसेमंद दोस्त, मददगार, उदार, ईमानदार, कभी-कभी क्रोधी, समृद्ध और काम के प्रति समर्पित।

गोवत्स द्वादशी 2026

प्रदोषकाल गोवत्स द्वादशी मुहूर्त: 05 नवंबर, शाम 05 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 10 मिनट तक
अवधि: 02 घंटे 37 मिनट
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 05 नवंबर, सुबह 10 बजकर 35 मिनट
द्वादशी तिथि समाप्त: 06 नवंबर, सुबह 10 बजकर 30 मिनट

धनतेरस से ठीक एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी का पावन पर्व मनाया जाता है। देखा जाए तो इस विशेष दिन पर गायों और उनके बछड़ों की पूजा करने का विधान है। पूजन के पश्चात उन्हें गेहूं से बने खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं।

ध्यान रहे कि जो जातक इस दिन उपवास रखते हैं, वे दिन भर गेहूं और दूध से बनी चीजों के सेवन से पूरी तरह परहेज करते हैं। इस दिन को नंदिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। हमारे शास्त्रों में नंदिनी को दैवीय और पवित्र गाय माना गया है।

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यह दैनिक पंचांग Astropatri.com की तरफ से प्रस्तुत किया गया है। सुझाव या प्रतिक्रिया के लिए कृपया hello@astropatri.com पर संपर्क करें।

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