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'सबको भोजन कराओ' से लेकर 'सब पास' तक: बाबा नीम करोली के 10 विचार जो बदल सकते हैं आपकी जिंदगी

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:00 AM (IST)

नीम करोली बाबा के 10 अनमोल वचन आज भी जीवन को सही दिशा देने में सहायक हैं। ये शिक्षाएं प्रेम, ...और पढ़ें

नीम करौली बाबा के जीवन के सबक

नीम करौली बाबा के जीवन के सबक

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज की तेजी से बदलती दुनिया में हर कोई पैसा, सफलता और भौतिक साधनों के पीछे भाग रहा है। लेकिन इस अंधी दौड़ के बीच जो चीज सबसे ज्यादा जरूरी है, वो है 'मन की शांति', संतोष और प्यार उसपर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है। आज मानव समाज की सबसे बड़ी चुनौती मानसिक तनाव, अकेलापन और अनिश्चितता बन चुकी है।

ऐसे समय में जब मन भटकता और कुछ समझ नहीं आता है कि जीवन में क्या चल रहा है, तब भक्तों को नीम करोली बाबा के उन विचारों को पढ़ना चाहिए, जिसने देश-विदेश के कई श्रद्धालुओं की जीवन दशा और सोचने का नजरिया बदलकर रख दिया। महाराज के वचन कोई भारी भरकम नहीं थे, बल्कि उन्होंने सिर्फ सरल, सहज और प्यार से भरी वाणी और लीलाओं के जरिए से मानवता को जीवन जीने का सबसे बेहतर तरीका बताया था। आइए जानते हैं बाबा नीम करोली के 10 अनमोल वचन के बारे में जो आज सालों भी उतने ही प्रभावशाली हैं।

बाबा नीम करोली के 10 अनमोल वचन

सबको भोजन कराओ

महाराज जी का अपने भक्तों के लिए सबसे पहला संदेश यही रहता था कि, 'सबको भोजन कराओ' उनके पास आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं लौट सकता था। महाराज जी का मानना था कि, जब तक मनुष्य भूखा है, उसे कभी भी ज्ञान और अध्यात्म की बातें समझ नहीं आ सकती हैं।

महाराज जी की इस आदत को आप भी अपने दैनिक जीवन में उतार सकते हैं। किसी असहाय को खाना खिलाने से या निस्वार्थ भाव से सेवा करने से आपके मन का अहंकार दूर हो जाता है।

सबसे प्यार करो, किसी से नफरत मत करो

महाराज जी के पास आने वाले भक्त किसी भी जाति, धर्म, राष्ट्र या सामाजिक वर्ग के क्यों न हों, बाबा उन्हें हमेशा प्यार, सही ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान करते थे। नफरत मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। जब व्यक्ति किसी से नफरत करता है, तो वह सबसे पहले अपनी ही शांति को नष्ट करता है। इसलिए सभी से प्रेम करना चाहिए।

राम नाम का जाप करो

बाबा नीम करोली के बारे में कहा जाता है कि, वह लगातार अपने कंबल के अंदर नाम जाप करते रहते थे और मन ही मन भगवान राम का स्मरण करते रहते थे। वे अपने भक्तों को भी अक्सर राम नाम जाप करने को कहते थे। बाबा की यह आदत अगर आप भी अपनाते हैं, तो जीवन में बड़े बदलाव महसूस कर सकते हैं।

सब पास

बाबा के बारे में बताया जाता है कि, जब कोई भक्त अपनी गंभीर से गंभीर समस्या, बीमारी, नौकरी का संकट या पारिवारिक क्लेश लेकर महाराज जी के पास रोते हुए जाता था, तब महाराज जी कहते थे, 'सब पास' यानी सब ठीक हो जाएगा। सब पास सिर्फ दो शब्द ही नहीं, बल्कि ईश्वरीय विधान पर परम विश्वास और आशा की किरण हैं। इसका मतलब है कि जीवन में आने वाली प्रत्येक मुश्किल परिस्थिति सिर्फ एक परीक्षा है और तुम्हारा विश्वास डिगा नहीं, तो ईश्वर तुम्हें इस परीक्षा में जरूर सफल कराएंगे।

सच बोलो

महाराज जी साफ-साफ कहते थे कि, व्यक्ति को अपना जीवन सच्चाई और ईमानदारी के साथ जीना चाहिए। एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं, जिससे मन में डर और मानसिक तनाव पैदा होता है। इसके उल्ट जो इंसान सच्चाई के राह पर चलता है, वह निर्भय होता है। सच बोलने वाले व्यक्ति के पीछे खुद ईश्वर का बल होता है।

अहंकार त्यागो

महाराज जी खुद एक सिद्ध संत थे, फिर भी वे इतने सामान्य अवस्था में रहते थे और कभी भी किसी से अपनी पूजा नहीं करवाते थे। जब कोई उनकी प्रशंसा करता है, तो वे तुरंत कहते 'सब हनुमान जी करते हैं, हम तो कुछ नहीं हैं।'

माफ करना सीखो

महाराज जी के पास कई बार ऐसे लोग भी आते थे, जो पहले उनके खिलाफ बातें करते थे, लेकिन महाराज जी उन्हें भी उसे प्रेम से गले लगाते थे, जैसे किसी अपने प्रिय बच्चे को गले लगा रहे हों। किसी की गलती को दिल से लगाकर रखना और बदला लेने की मन में भावना रखना आपके अंदर विष घोलने जैसा काम करता है।

हर इंसान में ईश्वर का वास

महाराज जी अक्सर कहते थे कि, मंदिर की मूर्तियों में ईश्वर को खोजना काफी आसान है, लेकिन असली साधना हर जीवित इंसान, पशु और पक्षी में ईश्वर के अंश को देखना है। जब आप हर इंसान में ईश्वर की झलक देखने लगते हैं, तो आपके मन से भेदभाव, कटुता और असम्मान का भाव अपने आप खत्म हो जाता है।

धन सिर्फ सेवा का साधन है

महाराज जी ने कभी भी पैसों की बचत नहीं की, जो भी दान या भेंट आश्रम में आती थी, वे उसे फौरन भंडारे, गरीबों की मदद, अस्पताल और जनसेवा से जुड़े कार्यों में लगा देते थे। महाराज जी कहना था कि, धन गलत चीज नहीं है, बल्कि पैसे का मोह और लालच बुरा है। धन का असल इस्तेमाल सिर्फ अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और समाज के असहाय लोगों की मदद करने के लिए है।

चिंता मत करो, ईश्वर पर पूरा विश्वास रखो

महाराज जी का अंतिम और सबसे शक्तिशाली मंत्र था, चिंता मत करो। वे कहते थे कि जब तुमने अपनी नाव ईश्वर को सौंप दी है, तो डूबने का डर कैसा। ज्यादा सोचना और भविष्य की चिंता करना हमारे वर्तमान को भी बर्बाद कर सकती है। जब हम अच्छे और सच्चे काम करते हैं, तो परिणाम ईश्वर पर ही छोड़ देना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।