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क्या आप भी सावन में खाते हैं दही? पहले जान लें धर्म और सेहत से जुड़ा ये अहम नियम

Published: Sat, 01 Aug 2026 11:15 AM (IST)

सावन मास में दही का सेवन धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों दृष्टिकोणों से गलत माना जाता है। धार्मिक मान्यताएं तामसिक भोजन ...और पढ़ें

सावन के महीने में दही खाने से क्यों बचना चाहिए?

सावन के महीने में दही खाने से क्यों बचना चाहिए?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हो चुकी है, वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए श्रावण मास सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि इस दौरान भगवान शिव अपने परिवार समेत पृथ्वी पर निवास करते हैं। जिस कारण वे भक्तों की इच्छाओं को जल्दी पूरा करता है।

सावन आते ही लोग पूजा-पाठ के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं, साथ ही खान-पान से जुड़े नियमों का भी पालन करते हैं। माना जाता है कि, श्रावण मास में दही नहीं खाना चाहिए। आइए जानते हैं धार्मिक और आयुर्वेदिक नजरिए से इसके पीछे का कारण?

श्रावण मास का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म और शिव पुराण के अनुसार, सावन का महीना पूजा, पाठ, जप, तप, संयम और सात्विक जीवन का प्रतीक होता है। इस दौरान व्यक्ति को तामसिक भोजन और आदतों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

कई परंपराओं में लोगों का मानना है कि, श्रावण मास के दौरान दही, कड़ी या खट्टी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। बताया जाता है कि, सावन के महीने में भगवान शिव के शिवलिंग पर ठंडी और सात्विक चीजें अर्पित करनी चाहिए और खुद भी भोजन में हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए।

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद में श्रावण मास को वर्षा ऋतु का समय माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी काफी ज्यादा होती है, जिस कारण पाचन शक्ति आम दिनों से कमजोर हो जाती है। बात की दही के सेवन करने की तो, दही स्वभाव से भारी और कफवर्धक माना जाता है।

सावन में अधिक मात्रा में दही खाने से गले से जुड़ी समस्या कफ, सर्दी जुकाम या पाचन संबंधी परेशानियां सता सकती हैं। इसी वजह से आयुर्वेद में बरसात के मौसम में विशेषकर रात के समय दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है।

सावन में किस तरह का भोजन सबसे सही?

सावन मास के दौरान ताजे फल, हरी-भरी सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तोरी, परवल, घी का सेवन करना सबसे सही माना जाता है। धार्मिक जानकार बताते हैं कि, सावन के महीने में खान-पान के नियमों का असल उद्देश्य सिर्फ धार्मिक अनुशासन नहीं, बल्कि सेहत की रक्षा करना भी है।

इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी सेहत, धार्मिक नियम, परंपरा और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार संतुलित और सात्विक भोजन खाना चाहिए। ऐसा करने से सावन महीने के दौरान शरीर स्वस्थ्य और ऊर्जावान रहता है। 

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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