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Masik Durgashtami 2026: इन सिद्ध मंत्रों के जप से करें मां दुर्गा को प्रसन्न, खुशियों से भर जाएगा आपका सूना आंगन

Published: Sat, 21 Feb 2026 08:00 PM (IST)

वैदिक पंचांग के अनुसार, 24 फरवरी को फाल्गुन माह की मासिक दुर्गा अष्टमी है। यह दिन मां दुर्गा और उनके ...और पढ़ें

Masik Durgashtami 2026: दुर्गा अष्टमी का धार्मिक महत्व

Masik Durgashtami 2026: दुर्गा अष्टमी का धार्मिक महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Masik Durgashtami 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 24 फरवरी को फाल्गुन माह की मासिक दुर्गा अष्टमी है। यह दिन पूर्णतया देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर जगत की देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए अष्टमी तिथि पर व्रत रखा जाता है।

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धार्मिक मत है कि ममतामयी देवी मां दुर्गा की पूजा-भक्ति और साधना करने वाले साधकों को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। अगर आप भी देवी मां दुर्गा की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो मासिक दुर्गा अष्टमी पर स्नान-ध्यान के बाद विधिपूर्वक मां दुर्गा की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

मां दुर्गा के मंत्र


1. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

2. हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।

सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

3. शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

4. रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

5.  देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

6. जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।

दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥


7. सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।

गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥

8.  “दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:

स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

9. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

10. पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत सङ्कटात् ॥
उमा देवी शिरः पातु ललाटं शूलधारिणी ।
चक्षुषी खेचरी पातु वदनं सर्वधारिणी ॥
जिह्वां च चण्डिका देवी ग्रीवां सौभद्रिका तथा ।
अशोकवासिनी चेतो द्वौ बाहू वज्रधारिणी ॥
हृदयं ललिता देवी उदरं सिंहवाहिनी ।
कटिं भगवती देवी द्वावूरू विन्ध्यवासिनी ॥
महाबाला च जङ्घे द्वे पादौ भूतलवासिनी
एवं स्थिताऽसि देवि त्वं त्रैलोक्यरक्षणात्मिके ।
रक्ष मां सर्वगात्रेषु दुर्गे दॆवि नमोऽस्तु ते ॥

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