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डर और बाधाओं से हैं परेशान? हनुमान जी को प्रसन्न करने वाली रामायण की इन चौपाइयों का पाठ जीवन में लाएगा बदलाव

Published: Sun, 11 Oct 2026 04:00 PM (IST)

हनुमान जी की आराधना और रामायण की चौपाइयों का पाठ जीवन के संकटों और भय को दूर करने में सहायक ...और पढ़ें

बेहद शक्तिशाली हैं रामायण की ये चौपाइयां (Picture Credit: AI Generated)

बेहद शक्तिशाली हैं रामायण की ये चौपाइयां (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. हनुमान जी की पूजा संकटों को दूर करती है।

  2. रामायण की चौपाइयों का पाठ फलदायी होता है।

  3. इनसे भय दूर होकर आत्मविश्वास बढ़ता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जीवन में आने वाले संकटों को दूर करने के लिए हनुमान जी की आराधना करना शुभ माना गया है। उन्हें संकटमोचन, बल, बुद्धि और विद्या का दाता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा और रामायण की चौपाइयों का पाठ करना बहुत फलदायी साबित होता है।

रामायण की कुछ चौपाइयों का पाठ करने से भक्त के जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव आते हैं, क्योंकि इनमें भक्ति, साहस, समर्पण और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास का संदेश छिपा है। अगर आप जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं या मन में किसी प्रकार का भय बना रहता है, तो नीचे दी गई रामायण की चौपाइयों का पाठ अवश्य करें।

मान्यता है कि जो भक्त इनका पाठ करता है, तो उसके जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं रामायण की इन शक्तिशाली चौपाइयों और उनके अर्थ के बारे में।

कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ (किष्किंधाकांड)

अर्थ: हे हनुमान जी! इस संसार में ऐसा कौन-सा कठिन काम है, जो आपके द्वारा पूरा न हो सके। प्रभु, आपकी कृपा से सभी कार्य सरलता से पूरे हो जाते हैं।

राम काजु लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥ (सुंदरकांड)

अर्थ: हे हनुमान जी! आपका अवतार धरती पर प्रभु श्री राम के कार्यों को सिद्ध करने के लिए ही हुआ है। अपने जीवन के इस वास्तविक उद्देश्य को सुनते ही हनुमान जी का आकार पर्वत के समान विशाल हो गया।

महाबीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना॥ (बालकांड)

अर्थ: मैं उन महावीर हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ, जिनके यश, पराक्रम और महिमा का बखान स्वयं भगवान श्रीराम ने अपने मुख से किया है।

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥ (सुंदरकांड)

अर्थ: सुंदरकांड से ली गई इस चौपाई का अर्थ है कि अयोध्यापुरी के राजा भगवान श्रीराम को हृदय में धारण कर किसी भी कार्य की शुरुआत करें, आपके सभी कार्य स्वतः ही सिद्ध हो जाएंगे।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।