'भूत पिशाच निकट नहीं आवै...' क्या आप जानते हैं इसका अर्थ? इस चौपाई के पाठ से छूमंतर होगा तनाव और भय
हनुमान चालीसा की चौपाई "भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै" का पाठ नकारात्मक शक्तियों और भय को ...और पढ़ें

'भूत पिशाच निकट नहीं आवै...' चौपाई का हिंदी अर्थ (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोजाना विधिपूर्वक हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से साधक को नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है और मानसिक तनाव दूर होता है। साथ ही हनुमान जी की कृपा से जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं।
हनुमान चालीसा में एक चौपाई अत्यधिक महत्वपूर्ण है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा की चौपाई है- "भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै"। इस चौपाई का पाठ जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए किया जाता है और इससे नकारात्मक ऊर्जा व बुरी नजर का प्रभाव दूर होता है।
लेकिन क्या आप इस चौपाई का हिंदी अर्थ जानते हैं? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं "भूत पिशाच निकट नहीं आवै..." (Bhoot Pishach Nikat Nahi Aave) चौपाई के हिंदी अर्थ और पाठ की विधि के बारे में।
हनुमान चालीसा की चौपाई
"भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै"
यह चौपाई गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा की 24वीं चौपाई है।
इस चौपाई का हिंदी अर्थ क्या है?
जब कोई व्यक्ति हनुमान जी का नाम जपता है, तो उसके आस-पास भूत, पिशाच या कोई भी बुरी शक्ति फटकती भी नहीं है। हनुमान जी के नाम के जप से ही सभी प्रकार के भय और बुरी शक्तियां दूर हो जाती हैं।
अज्ञात भय होगा दूर- जिन लोगों को जीवन में बिना किसी कारण के डर लगता है या रात में बुरे सपने आते हैं, तो उन्हें इस चौपाई का पाठ जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का पाठ करने से तनाव और सभी तरह का भय दूर होता है तथा बजरंगबली की कृपा बरसती है।
इस चौपाई के पाठ की सही विधि
- सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर या किसी शांत जगह पर बैठकर सच्चे मन से इस पंक्ति का पाठ करें।
- एक बात का विशेष ध्यान रखें कि पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- इस दौरान काले रंग के कपड़े भूलकर भी धारण न करें, क्योंकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
- बैठने के लिए कुशा या लाल रंग के ऊनी आसन का प्रयोग करें। सीधे जमीन पर नहीं बैठना चाहिए।
- अंत में दीपक जलाकर हनुमान जी की आरती करें और फल एवं बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
- इसके बाद लोगों में प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
यह भी पढ़ें- हनुमान चालीसा का पूरा लाभ पाने के लिए इन 5 बातों का रखें खास ध्यान
यह भी पढ़ें- हनुमान चालीसा की रचना से जुड़ी अद्भुत कहानी, पढ़ें तुलसीदास जी की भक्ति और बजरंगबली की शक्ति का रहस्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
