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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 04, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Dev Uthani Ekadashi 2022: इन विशेष मंत्रों के उच्चारण से जगाएं भगवान विष्णु को

By Shantanoo MishraEdited By:
Published: Fri, 04 Nov 2022 10:48 AM (GMT+05:30)

Dev Uthani Ekadashi 2022 कार्तिक मास भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में देवउठनी एकादशी व्रत का ...और पढ़ें

Dev Uthani Ekadashi 2022 देवउठनी एकादशी पर जरूर करें इन विशेष मंत्रों का जाप।
Dev Uthani Ekadashi 2022 देवउठनी एकादशी पर जरूर करें इन विशेष मंत्रों का जाप।

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क | Dev Uthani Ekadashi 2022: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि के के दिन भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं, जिसे देवउठनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है और उनसे भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार देवउठनी एकादशी व्रत आज यानि 04 नवम्बर (Dev Uthani Ekadashi 2022 Date) के दिन रखा जा रहा है। आज भगवान विष्णु को विशेष मंत्रों से योग निद्रा से जगाया जाता है। इन मंत्रों के शुद्ध उच्चारण से भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है। शास्त्रों में वर्णित यह मंत्र सरल अवश्य हैं लेकिन इन्हें चमत्कारी माना जाता है। इसलिए आज के दिन इनका उच्चारण करने से शुभ परिणाम मिलता है। इसके साथ भगवान विष्णु की आरती जरूर करें। शास्त्रों में बताया गया है कि बिना आरती के कोई भी पूजा सफल नहीं होती है।

भगवान विष्णु के मंत्र (Bhagwan Vishnu Mantra)

* शान्ता कारं भुजग शयनं पद्म नाभं सुरेशम्

विश्वा धारं गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभाङ्गम् ।

लक्ष्मी कान्तं कमल नयनं योगिभिर्ध्या नगम्यम्

वन्दे विष्णुं भव भय हरं सर्वलोकैक नाथम् ।।

* ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।

तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।

* मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।

मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः।।

* ॐ नमोः नारायणाय।।

* ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय।।

भगवान विष्णु आरती (Vishnu Ji Ki Aarti)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे।।

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का।। ॐ जय जगदीश हरे।।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी।। ॐ जय जगदीश हरे।।

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ जय जगदीश हरे।।

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय जगदीश हरे।।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति।। ॐ जय जगदीश हरे।।

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे।। ॐ जय जगदीश हरे।।

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा।। ॐ जय जगदीश हरे।।

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा।। ॐ जय जगदीश हरे।।

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे।। ॐ जय जगदीश हरे।।

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