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Chaitra Navratri 2026: नवरात्र के छठे दिन, मां कात्यायनी को प्रसन्न करने के लिए जपें ये दिव्य मंत्र

Published: Tue, 24 Mar 2026 07:15 AM (IST)Updated: Tue, 24 Mar 2026 08:18 AM (IST)

नवरात्र के छठे दिन आज मां कात्यायनी का पूजन है। मान्यता है कि आज के दिन मां कात्यायनी के इन ...और पढ़ें

आज के दिन करें इन मंत्रों का जप (Image Source: AI-Generated)

आज के दिन करें इन मंत्रों का जप (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का पावन पर्व अपने चरम पर है और कल यानी 24 मार्च को नवरात्र का छठा दिन है। यह दिन मां दुर्गा (Maa Durga) के अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी स्वरूप 'मां कात्यायनी' (Maa Katyayni) को समर्पित है।

स्वर्ण जैसी आभा वाली मां कात्यायनी शत्रुओं का नाश करने वाली और भक्तों को अभय वरदान देने वाली मानी जाती हैं। अगर आपके जीवन में संघर्ष बढ़ गया है या विवाह में अड़चनें आ रही हैं, तो कल का दिन आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

मां कात्यायनी की महिमा का वर्णन 'मार्कंडेय पुराण' के 'देवी महात्म्य' खंड में विस्तार से मिलता है। इसके अलावा, 'श्रीमद्भागवत महापुराण' के दसवें स्कंध में गोपियों द्वारा किए गए कात्यायनी व्रत का उल्लेख है, जो इसके महत्व को और बढ़ा देता है।

कल के दिन क्या करें खास?

शहद का भोग: मां कात्यायनी को शहद (Honey) बहुत प्रिय है। कल पूजा के समय उन्हें शहद का भोग जरूर लगाएं। इससे साधक की वाणी में मधुरता आती है और व्यक्तित्व में निखार आता है।

पीले वस्त्रों का प्रयोग: चूंकि मां का संबंध गुरु ग्रह से है, इसलिए कल पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करना और माता को पीले फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

शत्रु बाधा से मुक्ति: अगर आपके कार्यक्षेत्र में लोग आपको परेशान कर रहे हैं, तो कल माता के 'हृदय स्तोत्र' का पाठ करें। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।

देवी कात्यायनी मंत्र

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।। या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। ध्यान वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥

स्वर्णाआज्ञा चक्त्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।

Maa Katyayani

(Image Source: AI-Generated)

वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥

पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्‍‌नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रसन्नवदना प†वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।

कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥ स्तोत्र पाठ- कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।

स्मेरमुखीं शिवपत्‍‌नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥

पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।

सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।

परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

मां कात्यायनी कवच

कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।

ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥

कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥

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