भिवानी से लगभग 15 किलोमीटर दूर भिवानी-हिसार मार्ग पर स्थित गांव लोहारी जाटू में बस अड्डे के नजदीक स्थित बाबा गंगाराम का समाधि स्थल दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले असंख्य श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां पर हर वर्ष लगने वाले मेले में श्रद्धालु दूध और बर्फी का प्रसाद बांटते हैं तथा मन्नत पूरी होने पर भंडारा भी लगाते हैं। यहां पर गोशाला व गोगा पीर का मंदिर भी स्थित है।

रियाले प्रदेश हरियाणा में विभिन्न देवी-देवताओं के साथ-साथ अनके साधु-संत और महात्मा भी यहां के लोगों की भक्ति भावना के कारण आरंभ से ही पूजनीय रहे हैं। यही कारण है कि हरि के प्रदेश हरियाणा में विभिन्न स्थानों पर अनेक धार्मिक स्थल और मंदिर बने हुए हैं। भिवानी जिले के गांव लोहारी जाटू में स्थित बाबा गंगाराम धाम भी कई वर्षो से अनेक भक्तों को श्रद्धा का पयाम दे रहा है। यहां पर हर वर्ष भाद्रपद माह की पंचमी को लगने वाले विशाल मेले में पूजा-अर्चना के लिए देश-विदेश में रहने वाले बाबा गंगाराम के भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दिन विशेष रूप से नजदीकी गांव बलियाली व बलियाली से संबंध रखने वाले लोहारी जाटू के अग्रवाल गौत्र के लोग हर वर्ष इस मेले में पहुंचकर दूध और बर्फी का प्रसाद बांटते हैं तथा मन्नत पूरी होने पर भंडारा भी लगाते हैं। मेले में गांव के युवक व जिला प्रशासन मिलकर तमाम व्यवस्थाओं को संभालते हैं। इस दिन यहां के सभी स्कूलों में देसी घी से बने लड्डू भी बांटे जाते हैं।

भिवानी से लगभग 15 किलोमीटर दूर भिवानी-हिसार मार्ग पर स्थित गांव लोहारी जाटू में बस अड्डे के नजदीक स्थित गगनमंढ व सेठों वाला मंदिर नाम से जाना जाने वाला यह धार्मिक स्थल अग्रवाल गौत्र के लोगों के पूर्वज बालक गंगाराम का समाधि स्थल है। गांव से दक्षिण दिशा की ओर स्थित बाबा गंगाराम धाम के विशाल द्वार पर हाथ में लाठी लिए हुए बालक गंगाराम को गोसेवक के रूप में दिखाया गया है। लगभग एक एकड़ में बने इस मंदिर में अनेक कमरे बने हुए हैं तथा मंदिर में ही कुंआ और छायादार पेड़ों से घिरा तालाब भी स्थित है। मंदिर के मध्य भाग में पूजा स्थल बना हुआ है जहां बाबा की भव्य प्रतिमा को स्थापित किया गया है। इस पूजा स्थल के दक्षिण-पश्चिम भाग में चबूतरे पर बाबा गंगाराम व सती माता की मढि़यां बनी हुई हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह सती माता गंगाराम की ही धर्मपत्नी थीं। बाबा गंगाराम को अग्रवाल गौत्र के लोग अपना कुल देवता मानते हैं क्योंकि बाबा गंगाराम का संबंध समीप के गांव बलियाली के अग्रवाल गौत्र के सेठ परिवार से माना जाता है। यहां पर आने वाले भक्तों का यह भी मानना है कि गांव बलियाली की सीमा से लगते गांव लोहारी जाटू में किसी समय में बालक गंगाराम गऊ चराने आते थे। एक दिन खोई हुई गाय को ढूंढते-ढूंढते वे स्वयं भी इस क्षेत्र में कहीं खो गए। काफी ढूंढने के बाद जब परिजन निराश होकर घर लौट रहे थे तो एक बुजुर्ग सेठ को आवाज सुनाई दी कि 'बाबा मैं यहां हूं, मुझे कहीं मत ढूंढो बल्कि इस स्थान पर मेरी समाधि बनवा दो। जो भी सच्चे मन से मेरी पूजा करेगा मैं उसे पूरा लाभ पहुंचाऊंगा।' जब बाबा गंगाराम ने उस बुजुर्ग के अलावा कई लोगों के स्वप्न में आकर यह बात दोहराई तो उसके परिजनों ने यहां बालक गंगाराम की समाधि बनवा दी और बाबा गंगाराम के नाम से उनकी पूजा-अर्चना करने लगे।

दूर-दराज के लोगों की गहरी आस्था के कारण आज यह समाधि स्थल गगनमंढ न रहकर बाबा गंगाराम धाम बन गया है। बाबा गंगाराम की गोभक्ति को देखते हुए यहां गोशाला का निर्माण भी किया गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा गंगाराम की समाधि पर आकर शीश झुकाने से हर मन्नत पूरी होती है। इसी धाम के पास गोगा पीर का भव्य मंदिर भी है, जहां अनेक श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते रहते हैं।

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