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बाबा श्याम तुरंत सुनेंगे आपकी पुकार, खाटू श्याम जी को इस विधि से लगाएं 'इत्र की अर्जी'

Published: Thu, 28 May 2026 09:32 AM (IST)

धार्मिक आस्था के अनुसार, इस विधि से इत्र चढ़ाने से बाबा श्याम शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

खाटू श्याम जी को इत्र की अर्जी लगाने की विधि (Picture Credit- AI Generated)

खाटू श्याम जी को इत्र की अर्जी लगाने की विधि (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। खाटू नरेश बाबा श्याम के भक्तों के बीच इत्र अर्पित करने की एक बेहद गहरी और पावन मान्यता है। इत्र को प्रेम, सकारात्मकता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि सही विधि से बाबा को "इत्र की अर्जी" लगाई जाए, तो हारे के सहारे बाबा श्याम अपने भक्तों की सूनी झोली तुरंत भर देते हैं। क्या आप बाबा श्याम को इत्र चढ़ाने का सही तरीका जानते हैं, अगर नहीं, तो चलिए जानते हैं इस बारे में।

बाबा श्याम को इत्र चढ़ाने का सही तरीका

आपने देखा होगा कि कई भक्त बाबा के दरबार में अर्पित करने के लिए अक्सर इत्र की तीन शीशियां लेकर आते हैं। इसके पीछे एक बेहद सुंदर भाव छिपा है, जिसके अनुसार पहली शीशी बाबा के दरबार में अपनी अर्जी लगाने के लिए चढ़ाई जाती है। वहीं दूसरी शीशी अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना के साथ बाबा को धन्यवाद देने के लिए होती है। वहीं अगर तीसरी शीशी की बात की जाए, तो जब आपकी मनोकामना पूर्ण हो जाए, तब यह शीशी बाबा को आभार प्रकट करते हुए भोग के रूप में भेंट की जाती है।

ऐसे में जब आप मंदिर में दर्शन के लिए कतार (लाइन) में लगे हों, तब पुजारी जी के माध्यम से तीनों शीशियों को बाबा के चरणों या विग्रह के पास अर्पित करवाएं। इसके बाद जब सेवादार इत्र अर्पित करे, तो इस समय हाथ जोड़कर बाबा के सामने अपनी अर्जी लगाएं और अपनी समस्या या मनोकामना स्पष्ट रूप से मन में कहें। पुजारी जी आपको प्रसाद के रूप में उन तीन शीशियों में से कोई एक शीशी या थोड़ा-सा इत्र वापस लौटा देंगे। इस इत्र को घर ले आएं। इस शीशी को तब अर्पित कर सकते हैं, जब आपकी मनोकामना पूरी हो जाए।

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इत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें ये बातें

  • बाबा श्याम को खुशबू बहुत प्रिय है, लेकिन इत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है ताकि आपको पूजा का पूरा फल मिल सके।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा श्याम को गुलाब और केसर का इत्र सबसे अधिक प्रिय है। ऐसे में हमेशा असली और शुद्ध इत्र का ही चुनाव करें।
  • इत्र को हमेशा बाबा के चरणों में स्पर्श करवाएं या फिर फूलों की माला या गजरे पर रुई के फोहे (Cotton Swab) की मदद से लगाकर अर्पित करें।
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(Picture Credit- AI Generated)

घर पर इत्र अर्पित करने के नियम

अगर आप घर पर ही पूजा में इत्र अर्पित कर रहे हैं, तो कभी भी सीधे बाबा के शीश (चेहरे या माथे) पर नहीं लगाना चाहिए। हमेशा अपने दाहिने हाथ की अनामिका उंगली (Ring Finger) से ही इत्र को स्पर्श कराएं। दीया जलाने के बाद ही इत्र सेवा दें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेजी से बढ़ता है। इत्र हमेशा सीमित मात्रा में ही चढ़ाना चाहिए, क्योंकि ज्यादा इत्र लगाने से फूलों की अपनी प्राकृतिक महक दब जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।