ज्वाला देवी मंदिर के रहस्य: बिना तेल-बाती जलती हैं 9 ज्योतियां, अकबर का अहंकार भी हुआ था चूर
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वाला देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां सदियों से बिना तेल-बाती ...और पढ़ें

ज्वाला देवी मंदिर

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 51 शक्तिपीठों में मां ज्वाला देवी का मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर भगवान शिव और शक्ति को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से देवी सती के शरीर के 51 हिस्से किए थे, यह सभी अंग जहां-जहां गिरे वहीं पर शक्तिपीठ बन गए।
माना जाता है कि, ज्वाला देवी मंदिर में मां सती की जीव गिरी थी। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी का मंदिर जो प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
मंदिर से जुड़ा रहस्य
ज्वाला देवी मंदिर में सदियों से बिना तेल बाती और ईंधन के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं जल रही हैं। नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जो चांदी के जाला के बीच में हैं, महालाकी कहा जाता है।
वहीं अन्य 8 ज्योति अन्नपूर्णा, चण्डी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, आम्बिका और अंजी देवी ज्वाला देवी मंदिर में वास करती हैं।
ज्वाला मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा यह कहती है कि, भक्त गोरखनाथ यहां माता की आराधना करते थे। वह माता के परम भक्तों में शामिल थे। एक बार गोरखनाथ को काफी तेज भूख लगी और उन्होंने माता से बोला कि आप आग जलाकर पानी गर्म करो, मैं भिक्षा मांगकर लाता हूं।
माता गोरखनाथ के कहने पर आग जला दी, काफी समय बीत जाने के बाद भी गोरखनाथ नहीं लौटे। कहा जाता है कि, तब से माता अग्नि जलाकर गोरखनाथ का इंतजार कर रही हैं। ऐसी मान्यता है कि सतयुग आने पर ही गोरखनाथ मंदिर लौटेंगे। तब तक यह ज्वाला इसी तरह जलती रहेगी।

मंदिर का चमत्कारी कुंड
ज्वाल देवी शक्तिपीठ मंदिर के आस पास ज्वाला के अलावा एक ऐसा भी चमत्कारी कुआं हैं जिसे गोरख डिब्बी कहा जाता है। इस कुंड को देखने में ऐसा लगता है कि, मानो पानी काफी तेजी से खौल रहा है लेकिन जब पानी को स्पर्श करते हैं, तो पानी ठंडा लगता है।
अकबर और ज्वाला देवी मंदिर का किस्सा
कहा जाता है कि, मुगल सम्राट अकबर ने एक बार लोहे के ढक्कन से आग को ढककर और पानी की व्यवस्था करके उसे बुझाने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपने सभी प्रयासों में बुरी तरह असफल हुआ।
तब अकबर ने मंदिर में सोने का एक छाता भेंट किया। हालांकि देवी की शक्ति के प्रति उनके संदेह के कारण सोना एक अज्ञात धातु में बदल गया। इस घटना के बाद अकबर के मन में देवी के प्रति आस्था और मजबूत हो गई।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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