विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

GI टैग वाला लड्डू और बिना चीनी का पंचामृत: भारत के 5 मंदिर जहां प्रसाद का है अपना अलग रुतबा

Published: Sat, 01 Aug 2026 09:00 AM (IST)

भारत में कई मंदिर अपने चमत्कारों के साथ-साथ अनूठे और स्वादिष्ट प्रसाद के लिए भी प्रसिद्ध हैं। पुरी के महाप्रसाद, ...और पढ़ें

भारत के 5 मंदिरों का प्रसाद काफी प्रसिद्ध है। (Image AI)

भारत के 5 मंदिरों का प्रसाद काफी प्रसिद्ध है। (Image AI)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में अनेक मंदिर अपनी कथाओं, प्रचलित मान्यताओं और पूजा परंपरा के लिए काफी फेमस है, जब कुछ मंदिर अपने चमत्कार से ज्यादा वहां मिलने वाले प्रसाद के लिए जाने जाते हैं। हिंदू धर्म में प्रसाद को सामान्य भोजन नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद माना जाता है।

सबसे पहले भगवान को भोग अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटा जाता है। हालांकि हर प्रसाद का अपना आध्यात्मिक महत्व होता है, लेकिन कुछ मंदिरों का प्रसाद इतना प्रसिद्ध हो गया है कि, देशभर से तीर्थयात्री उसे चखने के लिए वहां आते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही अनोखे मंदिरों के बारे में।

पुरी जगन्नाथ धाम 

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में मिलने वाला महाप्रसाद भारत के किसी भी अन्य मंदिरों में मिलने वाले प्रसाद की तुलना में बिल्कुल अलग है। इस प्रसाद को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई में एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है। प्रसाद में यहां चावल, दाल, सब्जियां, खिचड़ी, करी और मिठाइयां शामिल होती हैं। इस भोजन को अभाडा कहा जाता है और इसे पारंपरिक रूप से भक्त के बिना किसी जाति या पद के भेदभाव के मिल जुल कर बांटकर खाया जाता है।

तिरुपति का तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर

भारत का सबसे मशहूर प्रसाद तिरुपति भगवान का लड्डू अपने खास स्वाद, जिसे बेसन, चीनी, घी, काजू और किशमिस का प्रयोग होता है। इसे ज्योग्राफिकल इंडकेशन का टैग भी मिला हुआ है। यहां हर साल लाखों की संख्या में लड्डू बनाए और बांटे जाते हैं।

पलानी मुरुगन मंदिर, तमिलनाडु

पलानी के मुरुगन मंदिर में बिना चीनी के बना पंचामृतम् तैयार किया जाता है। जिसे केले, गुड़, शहद, खजूर, किशमिश और इलायची से बनाया जाता है। इसकी रेसिपी सदियों से लगभग वैसी ही बनी हुई है और इसे अपनी अनोखी तैयारी और क्षेत्रीय पहचान के लिए GI टैग भी मिला हुआ है।

अंबालाप्पुझा श्री कृष्ण मंदिर, केरल

केरल के अंबालाप्पुझा मंदिर में चावल की क्रीमी खीर काफी फेमस है। चावल, दूध और चीनी को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता, जब तक कि इसमें कैरमल जैसी गहरी मिठास न आ जाए। अंबालाप्पुझा पालपायसम मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं का अहम हिस्सा है।

श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

राजस्थान के श्रीनाथजी मंदिर में भगवान की शाही जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए खास भोग लगता है। इनमें मठाड़ी सबसे खास है, यह चीनी की चाशनी में लिपटी हुई क्रंची, डीप-फ्राइट पेस्ट्री होती है, जिसे मंदिर के पारंपरिक भोग के तौर पर तैयार किया जाता है।

यह भी पढ़ें- क्या आपने कभी शिवलिंग पर दाल चढ़ते देखी है? मध्य प्रदेश के इस मंदिर की परंपरा कर देगी हैरान

यह भी पढ़ें- इन 5 मंदिरों का प्रसाद घर लाने की नहीं है परंपरा, क्या हैं इसके धर्मिक कारण

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।