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कबूतरों का जोड़ा और अमरकथा का रहस्य! 12 ज्योतिर्लिंगों से अलग होकर भी पवित्र है अमरनाथ यात्रा 

Published: Fri, 17 Apr 2026 12:30 PM (IST)

भक्तों के बाबा बर्फानी के दर्शन का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है, क्योंकि 3 जून से अमरनाथ यात्रा शुरू होने जा रही है।

बाबा बर्फानी के दर्शन का महत्व (Picture Credit- AI Generated)

बाबा बर्फानी के दर्शन का महत्व (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. 3 जून 2026 से हो रही है अमरनाथ यात्रा की शुरुआत

  2. इस गुफा में शिव जी ने माता पार्वती को सुनाई थी अमरकथा

  3. बाबा बर्फानी के दर्शन मात्र से खुल जाते हैं मोक्ष के द्वार

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का विशेष महत्व माना गया है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल न होकर भी अमरनाथ में स्थापित शिवलिंग के दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। इन्हें बाबा बर्फानी के रूप में पूजा जाता है, जो आस्था और मोक्ष का अनूठा केंद्र है। चलिए जानते हैं इस अद्भुत शिवलिंग का महत्व।

क्या है अमरेश्वर शिवलिंग का महत्व?

बाबा बर्फानी (अमरनाथ) 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल न होकर भी इसलिए खास हैं, क्योंकि यह स्वयंभू हिमलिंग है। जहां ज्योतिर्लिंग स्थापित किए जाते हैं, वहीं अमरनाथ गुफा में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बर्फ की बूंदों से बनता है, जो गुफा की छत से टपकती हैं। यह शिवलिंग चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता-बढ़ता है। यह शिवलिंग सावन में प्रकट होता है और सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन तक रहता है। धार्मिक मत है कि बाबा बर्फानी के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्यों पावन मानी जाती है यह गुफा?

अमरनाथ की गुफा को बहुत ही पावन गुफा माना जाता है, क्योंकि यह वही स्थान है, जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरकथा सुनाई थी। इसलिए इसे 'अमरनाथ' कहा जाता है और इस स्थान को मोक्ष की प्राप्ति के लिए परम पवित्र माना जाता है। इस गुफा की एक खास बात यह भी है कि यहां मुख्य शिवलिंग के साथ ही, गुफा में पार्वती और गणेश जी के भी हिमखंड (बर्फ के रूप) प्राकृतिक रूप से निर्मित होते हैं।

Amarnath Yatra ai

(Picture Credit- AI Generated)

अमर कबूतरों का रहस्य

पौराणिक कथा के अनुसार, जब शिव जी, माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तब दो कबूतरों ने इसे सुन लिया और वे अमर हो गए। जब शिव जी को इस बात का पता चला, तो पहले वह क्रोधित हो गए, लेकिन बाद में उन्होंने उन कबूतरों को शिव-पार्वती के प्रतीक के रूप में हमेशा गुफा में रहने का वरदान दिया। माना जाता है कि जिन श्रद्धालुओं को गुफा में दो कबूतर दिखते हैं, वह बहुत भाग्यशाली होते हैं।

ये बातें बनाती हैं अमरनाथ यात्रा को खास

अमरनाथ गुफा समुद्र तल से 14,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। इसलिए अमरनाथ यात्रा साहस और अटूट विश्वास का प्रतीक मानी जाती है। अमरनाथ धाम केवल एक धार्मिक स्थान नहीं है, बल्कि एक अलौकिक अनुभव है, जहां भक्त अमरत्व की कामना और भगवान शिव के दर्शन के लिए दुर्गम रास्तों से होकर पहुंचते हैं।

मान्यता है कि इस कठिन यात्रा को करने के बाद जो श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं, उनके जीवन की हर बाधा दूर होती है और उनकी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। 

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।