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एक जगह नहीं टिकता मन? बार-बार जॉब बदलने के पीछे कहीं आपकी कुंडली के ये ग्रह तो जिम्मेदार नहीं?

Published: Tue, 15 Sep 2026 06:15 PM (IST)

कई लोग जीवन में एक करियर पर टिक नहीं पाते और बार-बार बदलाव करते हैं, जिसके पीछे कुंडली में ग्रहों ...और पढ़ें

करियर में अस्थिरता और बोरियत के पीछे ज्योतिषीय कारण (Picture Credits - AI Images)

करियर में अस्थिरता और बोरियत के पीछे ज्योतिषीय कारण (Picture Credits - AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कई लोग जीवन में एक करियर पर टिक कर रहने के साथ लगातार उसपर मेहनत कर आगे बढ़ते हैं, जबकि हमारे आस-पास कुछ लोगों ऐसे भी हैं, जो कुछ बड़ा करने के चक्कर में बार-बार करियर बदलते रहते हैं।

कभी-कभी चीजें सिर्फ बोरियत या नए अवसरों की खोज का नहीं होता, बल्कि आपकी कुंडली में छिपे ग्रहों का भी इसमें हाथ होता है, जो इंसान को एक करियर पर टिकने नहीं देती है।

लगातार एक काम को करने के कारण आपको बोरियत और बेचैनी महसूस हो सकती है, जो आपको बार-बार कुछ अलग करने के लिए प्रेरित करती है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो इसके पीछे केवल आपका फैसला ही नहीं, बल्कि कुंडली में बैठे ग्रहों की बदलती स्थिति भी जिम्मेदार हो सकती है।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, व्यक्ति की आजीविका और करियर की स्थिरता का सीधा संबंध उसकी कुंडली के दशम भाव (कर्म भाव), उसके स्वामी तथा मन के कारक ग्रह चंद्रमा से होता है।

करियर में भटकाव पैदा करने वाले प्रमुख ज्योतिषीय कारण

द्विस्वभाव राशियों का प्रभाव: जब दशम भाव पर द्विस्वभाव राशियों (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) का प्रभाव होता है, तो व्यक्ति का मन एक ही पेशा या कार्य में लंबे समय तक नहीं टिक पाता।

द्विस्वभाव के कारण व्यक्ति को कई तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसमें जातक के मन में लगातार चीजों को लेकर दुविधा बनी रह सकती है। कई विकल्प होने के बाद भी फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।

छाया ग्रहों की दृष्टि: कर्म भाव पर राहु या केतु जैसे छाया ग्रहों की दृष्टि पड़ने से व्यक्ति भ्रमित होकर बार-बार नई राह चुनने लगता है।

पीड़ित चंद्रमा का प्रभाव: पीड़ित चंद्रमा व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को अस्थिर कर देता है, जिससे थोड़ा सा तनाव आते ही कार्य बदलने का विचार आने लगता है।

भावों का अशुभ संबंध:यदि दशम भाव के स्वामी का संबंध छठे या बारहवें भाव से बन जाए, तो निरंतर असंतोष की स्थिति बनी रहती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।