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राहु की महादशा में इन 3 ग्रहों की एंट्री से पलटेगी बाजी, शुक्र का साथ मिलते ही शुरू होगा 'राजयोग'

Published: Fri, 03 Apr 2026 02:30 PM (GMT+05:30)

राहु की महादशा हमेशा कष्टकारी नहीं होती। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब राहु के साथ गुरु, बुध या शुक्र की अंतर्दशा आती है, तो जीवन में बड़े बदलाव होते हैं।

Rahu Mahadasha Impact: 3 ग्रहों की एंट्री से आएगा बदलाव (Image Source: AI-Generated)

Rahu Mahadasha Impact: 3 ग्रहों की एंट्री से आएगा बदलाव (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में जब भी 'राहु' (Rahu) का नाम आता है, तो अक्सर लोग घबरा जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि राहु की महादशा इंसान के जीवन को पूरी तरह से उलट-पलट कर रख देती है। लेकिन हकीकत यह है कि राहु हमेशा बुरा नहीं होता।

राहु के इस लंबे समय के दौरान जब दूसरे ग्रहों की 'अंतर्दशा' शुरू होती है, तो वे राहु के प्रभाव को कभी शांत करते हैं, तो कभी उसे नई दिशा देते हैं। आइए जानते हैं कि राहु की महादशा में जब गुरु, बुध और शुक्र जैसे बड़े ग्रह आते हैं, तो आम आदमी की जिंदगी पर इसका क्या और कैसा असर पड़ता है।

1. राहु में गुरु (बृहस्पति) की अंतर्दशा

जब राहु की महादशा में गुरु का समय आता है, तो इसे ज्योतिष की भाषा में 'चांडाल योग' जैसी स्थिति भी माना जाता है, लेकिन अगर गुरु कुंडली में मजबूत हो, तो यह समय राहत लेकर आता है।

असर: राहु भ्रम पैदा करता है, जबकि गुरु ज्ञान का देवता है। इस दौरान इंसान का झुकाव अध्यात्म और धर्म की ओर बढ़ता है। जो काम राहु ने बिगाड़े होते हैं, गुरु उन्हें अपनी समझदारी से सुधारने की शक्ति देता है।

बृहत पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार, राहु में गुरु की अंतर्दशा मिश्रित फल देती है। अगर स्थिति अच्छी हो, तो इंसान को मान-सम्मान और पद की प्राप्ति होती है।

Grah Nakshatra

(Image Source: AI-Generated)

2. राहु में बुध की अंतर्दशा

राहु और बुध दोनों ही बुद्धि और चतुराई के ग्रह माने जाते हैं। जब ये दोनों मिलते हैं, तो इंसान का दिमाग रॉकेट की तरह चलने लगता है।

असर: इस दौरान व्यक्ति व्यापार में नए रिस्क लेता है और अक्सर सफल भी होता है। हालांकि, राहु की फितरत के कारण कई बार निर्णय जल्दबाजी में लिए जा सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। संवाद (Communication) के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए यह समय शानदार साबित हो सकता है।

इसका जिक्र फलदीपिका और सारावली जैसे ग्रंथों में उल्लेख है कि यह समय व्यापारिक लाभ और बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है।

3. राहु में शुक्र की अंतर्दशा

यह राहु की महादशा का सबसे ग्लैमरस और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है। राहु भोग है और शुक्र विलासिता (Luxury)।

असर: इस काल में इंसान की इच्छाएं सातवें आसमान पर होती हैं। नए रिश्ते बनना, अचानक धन लाभ होना या महंगी गाड़ियां और घर खरीदना इस दौरान आम है। लेकिन, सावधान रहें, क्योंकि राहु भ्रम का मालिक है। वह रिश्तों में गलतफहमी पैदा कर सकता है। अगर शुक्र कमजोर हो, तो दिखावे के चक्कर में भारी आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।

ज्योतिषीय सिद्धांतों (जैसे मानसागरी) के अनुसार, राहु-शुक्र का संयोग भौतिक सुख तो देता है, लेकिन चारित्रिक और पारिवारिक जीवन में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।