विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

परिवर्तिनी एकादशी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और वामन देव की पावन व्रत कथा

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:30 AM (IST)

परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 (Parivartini Ekadashi 2026) को मनाई जाएगी, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में अपनी करवट बदलते ...और पढ़ें

22 सितंबर 2026 को परिवर्तिनी एकादशी

22 सितंबर 2026 को परिवर्तिनी एकादशी

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल गणेशोत्सव के मध्य जब चारों ओर ढोल-नगारे और बप्पा के जयकारे की लहर गूंज रही होती है, तभी एक बेहद शांत और पवित्र तिथि आती है। भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से ही क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। साल के इस एक दिन वे अपनी बाईं ओर से दाईं ओर मुड़ते हैं।

इस दिन ब्रह्मांड को काफी सौम्य तरीके से सूचित किया जाता है कि, चातुर्मास की लंबी नींद आधी पूरी हो चुकी है। यह परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2026) है, जो इस साल 22 सितंबर 2026, मंगलवार के दिन है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 तिथि और समय (Parivartini Ekadashi 2026 date and time)

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। चूंकि एकादशी तिथि मध्यरात्रि के बजाय एक पल में शुरू और समाप्त होती है, इसलिए व्रत उस दिन रखा जाता है, जब सूर्योदय के समय एकादशी तिथि चल रही हो।

व्रत तिथि 22 सितंबर 2026, मंगलवार
एकादशी तिथि आरंभ 21 सितंबर 2026, रात 8 बजकर 1 मिनट पर
एकादशी तिथि समाप्त 22 सितंबर 2026, रात 9 बजकर 44 मिनट तक
पारण 23 सितंबर, सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तक
अधिष्ठाता देवता वामन देव

परिवर्तिनी एकादशी को किन-किन नामों से जाना जाता है?

परिवर्तिनी एकादशी- परिवर्तन से, जिस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में अपना करवट बदलते हैं।

पार्श्व एकादशी- पार्श्व एकादशी जिसका मतलब है बगल या पार्श्व भाग

वामन एकादशी- यह एकादशी तिथि भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है।

जलझुलानी एकादशी या डोल ग्यारस- राजस्थान, मध्य प्रदेश और ब्रज में देवता को पालकी या डोला में बाहर ले जाया जाता है और उनको नदी या तालाब में औपचारिक रूप से स्नान कराया जाता है।

parivartini ekadashi 2026 shubh muhurat paran time and puja samagri guide and vaman avatar story

परिवर्तिनी एकादशी 2026 कथा (Parivartini Ekadashi 2026 story)

ब्रह्मवैवर्त पुराण में परिवर्तिनी एकदशी की व्रत कथा का उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, प्रहलाद के पोते राजा बलि एक दैत्य था, लेकिन धर्मात्मा, उदार और अत्यंत समर्पित भाव से भरे भी थे। गहरी तपस्या और यज्ञ के बल पर वे इतने शक्तिशाली हो गए कि उन्होंने तीनों लोकों पर जीत हासिल कर ली। विस्थापित हुए देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। वे वामन रूप में एक छोटे ब्रह्मचारी बालक के रूप में आए और राजा बलि से अपने पैरों से नापी गई तीन कदम भूमि दान में मांग ली।

राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य ने विष्णु के वामन रूप को पहचान लिया, लेकिन राजा बलि ने एक बार जो वचन दे दिया उसे वापस लेने से मना कर दिया। उन्होंने संकल्प का जल उंडेलकर वरदान दिया। इसके बाद वामन ने त्रिविक्रम रूप (ब्रह्मांड में विचरण करने वाला रूप) धारण किया। उनके एक कदम से पूरी पृथ्वी नप गई, दूसरे कदम से आकाश और तीसरे कदम के लिए कोई जगह नहीं बची थी और राजा बलि ने अपना सिर झुकाकर उसे अर्पित कर दिया।

भगवान विष्णु राजा बलि के इस स्वभाव से काफी प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा बलि का नाश नहीं किया, बल्कि सुतल लोक दिया गया और यह आश्वासन दिया कि खुद भगवान उनके द्वार पर रक्षक के रूप में खड़े रहेंगे। ऐसा माना जाता है कि, विष्णु का एक रूप आज भी राजा बलि के साथ रहता है, जबकि दूसरा रूप शेषनाग में क्षीरसागर में विराजमान है और परिवर्तिनी एकादशी वह दिन है जो इन दोनों को आपस में जोड़ती है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पूजा विधि (Parivartini Ekadashi 2026 puja Vidhi)

परिवर्तिनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनने चाहिए। व्रत का संकल्प लेकर अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य मन में बोलें।

पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर, चौकी पर पीला आसन बिछाएं और भगवान विष्णु या वामन देव की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। पानी से भरा तांबे का कलश जिसके ऊपर आम के पत्ते और एक नारियल रखें।

मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें और फिर साफ पानी से धोकर साफ कपड़े से पोछे।

विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाने के बाद रोली, अक्षत, पीले फूल, धूप-दीप और शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।

विष्णु जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। कोशिश करें पूजा के लिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते कभी न तोड़ें।

भगवान विष्णु को पंचमेवा, फल और खीर का भोग अर्पित करना चाहिए। हर प्रसाद में तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल करना चाहिए।

विष्णु सहस्रनाम पाठ के अलावा परिवर्तिनी एकादशी की कथा भी जरूर पढ़ें। इसके अलावा ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें।

यह भी पढ़ें- 22 सितंबर को है परिवर्तिनी एकादशी, अभी नोट करें पूजा शुभ मुहूर्त और पारण का समय

यह भी पढ़ें- सितंबर 2026 में कब-कब है एकादशी? जानें अजा और परिवर्तिनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त और महत्व

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।