22 सितंबर को है परिवर्तिनी एकादशी, अभी नोट करें पूजा शुभ मुहूर्त और पारण का समय
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जिसमें भगवान विष्णु और ...और पढ़ें

परिवर्तिनी एकादशी पर योग निद्रा में करवट बदलते है विष्णु जी (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विशेष महत्व है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन चातुर्मास में योग निद्रा के दौरान भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिन किया जाएगा परिवर्तिनी एकादशी व्रत और क्या है इसका शुभ मुहूर्त।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 की तिथि और मुहूर्त (Parivartini Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि की शुरुआत- 21 सितंबर की रात 8 बजे से
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि का समापन- 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार, 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी व्रत किया जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण टाइम (Parivartini Ekadashi Vrat Paran Time)
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। इस दिन अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना शुभ माना जाता है। व्रत का पारण करने का सही समय 23 सितंबर की सुबह 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 8 बजकर 35 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 35 मिनट से 04 बजकर 22 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 15 मिनट से 03 बजकर 04 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 42 मिनट तक
रवि योग- सुबह को 06 बजकर 09 मिनट से 07 बजकर 06 मिनट तक
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के पांचवें अवतार वामन अवतार की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा करने से साधक को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं। परिवर्तिनी एकादशी और द्वादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर में या गरीब लोगों को सच्चे मन से विशेष चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
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