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पद्मिनी एकादशी व्रत: 3 साल बाद आया पुरुषोत्तम मास का महासंयोग, ऐसे करें भगवान विष्णु की आराधना

Published: Wed, 27 May 2026 06:36 AM (GMT+05:30)

आज यानी 27 मई को पद्मिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा, जो प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्ति के लिए एक उत्तम दिन है।

पद्मिनी एकादशी व्रत पूजा विधि (Picture Credit- AI Generated)

पद्मिनी एकादशी व्रत पूजा विधि (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात पद्मिनी एकादशी की हो, तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। यह अन्य एकादशी तिथियों से इसलिए विशेष है, क्योंकि यह केवल अधिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से साधक को जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। चलिए पढ़ते हैं पद्मिनी एकादशी की पूजा विधि और भगवान विष्णु के मंत्र।

पद्मिनी एकादशी पूजा विधि

  • एकादशी के पावन दिन पर, सूर्योदय से पूर्व जागें और जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद, स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें, फिर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल पर पवित्र गंगाजल का छिड़काव करें।
  • एक चौकी पर साफ पीला कपड़ा बिछाएं और इसपर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को गंगाजल से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। उन्हें पीले फूल, धूप, दीप और पवित्र गंध (चंदन) अर्पित करें।
  • इस दिन भगवान विष्णु को खीर, पंचामृत आदि का भोग अर्पित करें।
  • भगवान को अर्पित किए गए भोग में तुलसी दल जरूर अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना प्रभु श्रीहरि का भोग अधूरा माना जाता है।
  • पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें और अंत में, सभी लोगों में प्रसाद बांटें।
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(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
 

भगवान विष्णु के मंत्र

1. विष्णु मूल मंत्र - ॐ नमोः नारायणाय॥

2. विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र - ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

3. विष्णु गायत्री मंत्र -

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

4. मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

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(Picture Credit- AI Generated)

एकादशी की आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।।

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।

गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,

नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,

नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ ।।

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।

शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ ।।

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