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इंदिरा एकादशी 2026: पितरों को तारने वाला सबसे खास व्रत, यह है संपूर्ण पूजा विधि और मुहूर्त

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:30 AM (IST)

इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी, जो पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। ...और पढ़ें

इंदिरा एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में मानसून की समाप्ति के आसपास पितृ पक्ष का पर्व शुरू हो जाता है, जो पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करना का सुनहरा मौका है। श्राद्ध पक्ष वह समय है, जब हर कोई अपने पूर्वजों को याद करने के साथ पिंडदान और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान को निभाता है।

इसी पखवाड़े में इंदिरा एकादशी भी आती है, जो भगवान विष्णु की पूजा और उपवास के लिए सबसे खास दिन माना जाता है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी 06 अक्टूबर, मंगलवार के दिन यानी आज है।

इंदिरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

विवरण  दिनांक समय
इंदिरा एकादशी 2026 मंगलवार 06 अक्टूबर 2026
पक्ष अश्विन माह की कृष्ण पक्ष
एकादशी तिथि प्रारंभ 6 अक्टूबर की सुबह 2 बजकर 7 मिनट पर
एकादशी तिथि का समापन 7 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजकर 34 मिनट पर
पारण 7 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर 8 बजकर 38 मिनट तक

पितृ पक्ष के दौरान इंदिरा एकादशी क्यों मनाई जाती है?

अधिकतर एकादशी भक्तों के खुद के अनुशासन और भक्ति से जुड़ी है, लेकिन इंदिरा एकादशी इससे अलग है। चूंकि यह ऐसे समय पर आती है, जब परिवार पहले से ही अपने दिवंगत प्रियजनों के लिए अनुष्ठान कर रहे होते हैं, इसलिए इसे लंबे समय से पूर्वजों को व्रत का पुण्य समर्पित करने के रूप में देखा जाता है।

माना जाता है कि, इस व्रत को करने से यमलोक में कष्ट भोग रहे पूर्वजों भगवान विष्णु का वैकुंठ धाम प्राप्त होता है। भक्तों का मानना है कि, इस व्रत का विधिपूर्वक पालन करने से परिवार को भी लाभ मिलता है। ये धार्मिक मान्यताएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं और भक्त इन्हें अपने नजरिए से देखते हैं।

इंदिरा एकादशी का व्रत कैसे रखा जाता है?

एकादशी का व्रत एकादशी तिथि से एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है, जिसमें पूर्व संध्या की बेला पर सादा भोजन किया जाता है। एकादशी की सुबह भक्त परंपरा के मुताबिक जल्दी उठकर स्नान करते हैं और फिर स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करते हैं।

एकादशी का व्रत रखने का तरीका अलग-अलग भी हो सकता है। कुछ परिवार भोजन और पानी का पूरी तरह से त्याग करते हैं, तो कुछ सिर्फ फल, दूध या पानी पी लेते हैं और कई लोग अनाज और दालों से भी परहेज करते हैं। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा, भजन, कीर्तन और नाम जप करके किया जाता है।

इंदिरा एकादशी 2026 पूजा विधि

इंदिरा एकादशी के मौके पर सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।

इसके बाद उन्हें घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं। दीपक को प्रकाश का प्रतीक माना जाता है और अधिकांश विष्णु पूजा में सबसे पहले दीपक ही जलाया जाता है।

इसके बाद पीले रंग के फूल भगवान विष्णु को अर्पित करें। इसके अलावा तुलसी के पत्ते भी श्रीविष्णु को बेहद प्रिय हैं। एकादशी के मौके पर भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है।

इसके बाद भगवान विष्णु को पंचामृत अर्पित करें। साथ ही भोग के रूप में मौसमी फल भी अर्पित कर सकते हैं।

भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उनसे जुड़ा मंत्र या 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

दिन खत्म होने के बाद श्रीविष्णु की प्रतिमा या फोटे के सामने दीपक जलाकर उनकी विधिवत रूप से आरती करनी चाहिए।

इंदिरा एकादशी के मौके पर जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। दान के रूप में आप उन्हें पीले रंग की कोई भी वस्तु दे सकते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।