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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 22, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Apara Ekadashi 2025: एकादशी पर तुलसी पूजन से मिलेगा विष्णु जी का आशीर्वाद, जानें विधि

Published: Thu, 22 May 2025 04:31 PM (IST)

एकादशी के दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी गई है। अपरा एकादशी ...और पढ़ें

एकदाशी के दिन ऐसे करें तुलसी जी की पूजा।
एकदाशी के दिन ऐसे करें तुलसी जी की पूजा।

HighLights

  1. एकादशी पर होती है भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा।
  2. इस दिन व्रत करने से साधक को मिलते हैं अच्छे परिणाम।
  3. एकदाशी के दिन शुभ माना जाता है तुलसी पूजन।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर माह की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के निमित्त व्रत करने का विधान है। इस बार 23 मई को अपरा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। एकादशी के दिन तुलसी पूजन से भी जीवन में अच्छे परिणाम मिलते हैं। मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी पूजन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दौरान आपको कुछ जरूरी नियमों का ध्यान भी रखना चाहिए। 

इस तरह करें पूजा

अपरा एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान आदि से मुक्त हो जाएं और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई के बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें। विष्णु जी के भोग में तुलसी जरूरी रूप से अर्पित करें, वरना इसके बिना उनका भोग अधूरा माना जता है। इसके बाद तुलसी की भी पूजा-अर्चना करें और इस दौरान तुलसी जी को लाल चुनरी अर्पित करें। श्याम के समय तुलसी के पास दीपक जलाएं।

रखें इन बातों का ध्यान

अपरा एकादशी तिथि के दिन तुलसी में भूल से भी जल अर्पित नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर तुलसी माता भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत करती हैं। इसी के साथ एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते उतारने या तुलसी को किसी तरह का नुकसान पहुंचाना भी शुभ नहीं होता। ऐसे में आप एक दिन पहले तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़कर रख सकते हैं या फिर नीचे गिरे हुए पत्तों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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तुलसी जी के मंत्र -

एकादशी के दिन तुलसी को पूजा के दौरान आप तुलसी के मंत्रों का जप भी कर सकते हैं। इससे आपके ऊपर विष्णु जी और माता लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है।

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

तुलसी गायत्री मंत्र - ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।

(Picture Credit: Freepik)

तुलसी नामाष्टक मंत्र -

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।