करण कुंद्रा और अनुषा दांडेकर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। छोटे परदे पर धारावाहिक 'कितनी मोहब्बत है' से पहचान बनाने वाले करण बॉलीवुड में 'हॉरर स्टोरी' फिल्म से एंट्री ले चुके हैं। वहीं उनकी बेस्ट फ्रेंड अनुषा दांडेकर बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'विरुद्ध' और 'डेल्ही बेली' जैसी फिल्में कर चुकी हैं। हाल ही में दोनों एमटीवी के नए शो 'लव स्कूल' का सीजन 2 होस्ट करने जा रहे हैं। कैसा है इन दोनों का रिश्ता, जानते हैं। पहली मुलाकात करण : मैं अनुषा को बहुत समय से जानता था। मैं और अनुषा दोनों ही एमटीवी से जुडे हुए थे लेकिन हमारी दोस्ती की शुरुआत 2015 में हुई। हम दोनों ही एमटीवी के साथ यूरोप की एक ट्रिप पर जा रहे थे। इस ट्रिप के दौरान हमारी जान-पहचान हुई फिर दोस्ती और आज हम बेस्ट फ्रेंड्स हैं। अनुषा : हमारी दोस्ती ज्यादा पुरानी नहीं है लेकिन दोस्ती मिनटों या घंटों से तय नहीं होती। किसी का साथ ऐसा होता है कि वह चंद मिनटों में ही आपको अपना बना लेता है। मेरा और करण का रिश्ता भी ऐसा ही रिश्ता है। जुदा-जुदा फिर भी एक करण : मैं पंजाबी लडका हूं। पंजाब के एक छोटे से शहर से मेरा ताल्लुक है जबकि अनुषा महाराष्ट्र की हैं। वह ऑस्ट्रेलिया में पली-बढी हैं लेकिन वह बहुत ही देसी हैं। अनुषा : हम लोग अलग-अलग कल्चर से हैं लेकिन एक-दूसरे को समझने में यह बात कभी बाधक नहींबनी बल्कि इसने हमारी दोस्ती को और मजबूती ही दी। मुझे करण के साथ उनके त्योहार सेलिब्रेट करने में मजा आता है, वहींकरण को भी महाराष्ट्रियन परंपरा को समझने और उसे सेलिब्रेट करने में मजा आता है। क्रेजी हैं हम करण : हम दोनों ही क्रेजी हैं। कोई भी नई चीज करने से हम डरते नहीं हैं। हाल ही में हम दोनों ने अपने बालों को ब्लॉन्ड करा लिया। हम दोनों सलेब्रिटी हैं, काम को लेकर हमारे कमिटमेंट्स होते हैं। ऐसे में ऐसा लुक लेना किसी खतरे से कम नहीं है लेकिन फिर भी हमने इसे एंजॉय किया। हालांकि मेरी मम्मी को मेरा यह लुक बिलकुल पसंद नहीं आया था। अनुषा : हम दोनों को एडवेंचर पसंद है। हमारी यह आदत हमारे कपडों और बालों में भी नजर आती है। हम हमेशा अजीबो गरीब चीजें करते रहते हैं और ऐसा करने में हमें मजा आता है। बिजी शेड्यूल करण : हम दोनों एक ऐसे फील्ड से हैं, जहां 24 घंटे का वर्किंग शेड्यूल होता है। अनुषा सेम फील्ड से हैं तो मेरे बिजी रहने पर वह शिकायत नहींकर सकतीं और इसके अपने फायदे हैं। अनुषा : यह बात तो सही है कि समय की कमी का रोना मैं नहीं रो सकती। मैं खुद भी अपने कमिटमेंट्स की वजह से बिजी रहती हूं लेकिन हम दोनों को जैसे ही समय मिलता है, हम मस्ती करने के लिए दौड पडते हैं। खुशहाल जीवन के नुस्खे करण : एक रिश्ता तभी खुशहाल हो सकता है, जब रिश्ते में कमिटमेंट और ट्रस्ट हो। अगर यह नहीं है तो आपका रिश्ता कभी भी कामयाब नहीं हो सकता। अनुषा : एक रिश्ते में रोमैंस बना रहे, यह भी जरूरी है। इसके लिए जरूरत है कि आप एक-दूसरे के साथ डेट पर जाएं, फिल्में देखें, साथ डिनर करें। एक-दूसरे को वक्त देना बेहद जरूरी है। रिश्तों की कमजोर कडी करण : अकसर कपल्स के बीच प्रॉब्लम तब आती है, जब हम इस एहसास को ओढ लेते हैं कि यह तो अब हमारा है और अब यह कहीं नहीं जाने वाला। हम अपने ऊपर ध्यान देना छोड देते हैं। इससे जीवन में नीरसता आने लगती है। यही नीरसता आगे जाकर शिकवे-शिकायतों में बदलती है, जो नहीं होना चाहिए। तैयार होने का कतई यह मतलब नहीं है कि हमें किसी को इंप्रेस करना है। बनना-संवरना एक तरह की ग्रूमिंग है, जो हम किसी और के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए करते हैं। अनुषा : खुद को कमतर आंकने की जो प्रवृत्ति है, वही रिश्तों को खोखला करने का काम करती हैं। हम आत्मविश्वास खोने लगते हैं। रिश्ते की मजबूती के लिए दो लोगों का एक-दूसरे पर ही नहीं, खुद पर भी विश्वास होना जरूरी है। लिव-इन रिलेशनशिप करण : एक वक्त था, जब लडके-लडकियों को शादी से पहले आपस में मिलने तक नहीं दिया जाता था। शादी के बाद ही वे एक-दूसरे को जान पाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। मेरा मानना है कि लिव-इन में रहने में कोई बुराई नहीं है। साथ रहने से हम एक-दूसरे की अच्छी-बुरी हर आदत को जान लेते हैं, जो चंद घंटों की मीटिंग में नहीं जान सकते। अनुषा : लिव-इन एक-दूसरे को और नजदीक से जानने-पहचानने की आजादी देता है। यह उन आने वाली समस्याओं से बचाता है, जो शादी के बाद खडी होती हैं, जिसकी अकसर लडकियां या लडके शिकायत करते नजर आते हैं कि तुम पहले जैसे नहीं रहे। साथ रहकर पहले ही देख लीजिए कि कौन कैसा है, फिर शिकायत की कोई गुंजाइश ही नहीं रह जाएगी। पसंद-नापसंद करण : मुझे तो अनुषा की हर बात अच्छी लगती है। उनमें कोई खामी नहीं है। वह जब भोली सी सूरत लेकर मेरे सामने आती हैं तो उनसे मैं किसी बात पर नाराज भी होना चाहूं तो हो नहीं पाता। अनुषा : करण बहुत फनी हैं। करण की लोगों को पल भर में खुश करने की आदत ही है, जो मुझे बेहद अच्छी लगती है। मेरे परिवार में मां और मेरी दो बहनें हैं। हमारा परिवार स्त्रियों का परिवार है और करण स्त्रियों को खुश करना अच्छी तरह जानते हैं। हालांकि करण में एक खराब आदत भी है। करण को जब गुस्सा आता है तो वह किसी से बात नहीं करते। चुपचाप बैठ जाते हैं। मुझे यह अच्छा नहीं लगता। मैं सोचती हूं कि करण को अपनी फीलिंग्स शेयर करनी चाहिए। संगीता सिंह