स्वास्थ्य से खिलवाड खानपान की आदतों में बदलाव आते रहते हैं। लोग स्वाद के लिए अपनी सेहत को भी दांव पर लगाने लगे हैं। पहले स्टूडेंट्स के टिफिन में आलू-गोभी के परांठे देखने को मिल जाते थे लेकिन आजकल उनके लिए घर का खाना 'आउट ऑफ फैशन सा बनता जा रहा है। वे कैंटीन में मिलने वाले मोमोज, समोसे, मैगी और ब्रेड पकौडे को ज्यादा वरीयता देने लगे हैं। अनियमित खानपान की वजह से उन्हें स्ट्रेस, कब्ज और एसिडिटी जैसी बीमारियां भी होने लगी हैं। एक सर्वे के मुताबिक, यदि नियमित रूप से घर का खाना खाया जाए तो 70 प्रतिशत लोगों की बीमारियां अपने आप ही खत्म हो जाएंगी। अधिकतर युवा घर से दूर रहकर दूसरे शहरों में पढाई या नौकरी कर रहे हैं। घर का खाना न मिल पाने के कारण वे मार्केट में जंक फूड खाने को मजबूर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक भारत में सबसे अधिक मृत्यु हृदय रोग की वजह से होगी। खानपान की बदलती आदतें आज के युवाओं के लिए बहुत हानिकारक हैं। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि पौष्टिक भोजन का सेवन कर जंक फूड को बाय बोल दिया जाए क्योंकि स्वस्थ होने पर ही हम अपने अमूल्य जीवन का आनंद उठा सकेंगे। -कर्तव्य खन्ना

स्वाद और सेहत का कॉम्बो स्वाद के लिए सेहत से कॉम्प्रोमाइज करना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। माना कि पेरेंट्स से लेकर बच्चे तक, सब आज बहुत व्यस्त हैं पर इसका मतलब यह नहीं है कि खानपान की आदतों को ही बदल दिया जाए। अब तो ज्यादातर स्कूलों में लंच का शेड्यूल फिक्स कर दिया गया है, जिसे फॉलो करना सबकी जिम्मेदारी और मजबूरी, दोनों ही है। हमेशा मार्केट का इंस्टेंट फूड या रेडी टु ईट फूड आइटम्स खाने के बजाय कोशिश की जानी चाहिए कि स्वास्थ्यवर्धक खाना खाया जाए। पौष्टिक आहार न मिलने के कारण कम उम्र में ही बच्चे संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अगर बच्चे बर्गर, फ्रेंच फ्राइज या पिज्जा जैसी चीजें खाने के शौकीन हों तो हमेशा बाहर से मंगवाने के बजाय उन्हें घर पर ही बनाने का प्रयास करना चाहिए। इससे आपको पता रहेगा कि उसमें क्या सामग्रियां डाली जा रहीं हैं और आप उन्हें बेहतर तरीके से भी बना सकेंगे। फूड वेबसाइट्स देखकर जल्द तैयार की जाने वाली टेस्टी रेसिपीज सीखी जा सकती हैं। कभी-कभार मार्केट की चीजों का सेवन किया जा सकता है, बस उसकी सही मात्रा पता होनी चाहिए। -साहिल