नई दिल्ली। नौवां विश्व हिंदी सम्मेलन इस वर्ष जोहांसबर्ग [दक्षिण अफ्रीका] में 22 सितंबर से शुरू होगा और 24 सितंबर तक चलेगा।

इस सम्मेलन के बारे में जानकरी देने के लिए पत्रकार वार्ता नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस के बालरूम में 18 जुलाई को बुलाई जाएगी। इस अवसर पर विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर सम्मेलन का लोगो जारी करेंगी और वेबसाइट की शुरुआत करेंगी।

विश्व हिंदी सम्मेलन की शुरुआत तीन दशक पहले हुई थी। पहला सम्मेलन नागपुर में जनवरी 1975 में हुआ था। इसका आयोजन वर्धा की राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने किया था। अब तक आठ विश्व हिंदी सम्मेलन विभिन्न देशों में हो चुका है। भारत में यह सम्मेलन 1975 और 1983 में, मारीशस में 1976 और 1993 में, त्रिनिदाद एवं टोबैगो में 1996 में, ब्रिटेन में 1999 में और अमेरिका में 2007 में हुआ था।

विदेश मंत्रालय नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन से संबंधित कार्यो के समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय है। इस आयोजन के लिए विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति गठित की गई है। सम्मेलन के विभिन्न पहलुओं पर विचार के लिए छह उप समितियां बनाई गई हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय उच्चायुक्त वीरेंद्र गुप्ता की देखरेख में एक आयोजन समिति गठित की गई है। दक्षिण अफ्रीका का एक स्वयंसेवी संगठन हिंदी शिक्षा संघ इस सम्मेलन का स्थानीय साझेदार है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार भाषा की अस्मिता और हिंदी का वैश्विक संदर्भ सम्मेलन की मुख्य विषय-वस्तु है। सम्मेलन में नौ शास्त्रीय विवेचन सत्र व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा तथा प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इसी क्रम में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, नई दिल्ली की ओर से महात्मा गांधी की लिखी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

बताया गया है कि सम्मेलन स्थल का नाम गांधीग्राम रखा जाएगा और विभिन्न सत्र नेलसन मंडेला सभागार सहित अन्य सभागारों में संचालित किए जाएंगे। इन सत्रों के नाम शांति, सत्य, अहिंसा,नीति और न्याय रखे गए हैं।

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