अरावली बचाने और अवैध खनन रोकने का प्लान, सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सामने गूंजी डूंगरपुर के अरावली क्षेत्र की आवाज
डूंगरपुर में अरावली संरक्षण पर हाई पावर कमेटी की बैठक हुई, जिसमें अवैध खनन, जनजातीय भूमि अधिकार और स्थानीय विकास ...और पढ़ें
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अवैध खनन, जनजातीय भूमि अधिकार अरावली संरक्षण समिति के समक्ष उठे।
HighLights
अवैध खनन, जनजातीय भूमि अधिकार अरावली संरक्षण समिति के समक्ष उठे।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी अरावली पर्वतमाला के संरक्षण में महत्वपूर्ण।
पर्यावरण संतुलन और आजीविका सुनिश्चित करने हेतु सुझाव एकत्र किए गए।
जागरण संवाददाता, उदयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलन को लेकर रविवार को डूंगरपुर में हाई पावर कमेटी के सामने क्षेत्र की जमीनी समस्याएं और सुझाव रखे गए।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना में गठित समिति ने शिवाजी नगर स्थित अंबेडकर भवन में हितधारकों से संवाद किया। पर्यावरण संरक्षण के साथ अवैध खनन पर प्रभावी रोक, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जनजातीय समुदायों के भूमि अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर स्थानीय आबादी की आजीविका प्रमुख मुद्दे रहे।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर
समिति की अध्यक्ष एवं भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून की महानिदेशक कंचन देवी ने कहा कि अरावली क्षेत्र में रहने वाले समुदायों की समस्याओं, आवश्यकताओं और आजीविका से जुड़े विषयों की जानकारी जुटाई जा रही है।
प्राप्त सुझावों और क्षेत्रीय जानकारी का संकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि अरावली संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के हित और क्षेत्रीय विकास के बीच संतुलन बनाया जा सके।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्भरण और पट्टों की मांग
हितधारक बंशीलाल कटारा ने कहा कि अरावली स्थानीय लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी है, इसलिए संरक्षण में समुदाय की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने खनन से बने गड्ढों का पुनर्भरण, खनन गतिविधियों में निर्धारित मानकों की पालना और ग्राम सभाओं के माध्यम से संरक्षण को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। साथ ही वन क्षेत्रों में लंबे समय से रह रहे जनजातीय परिवारों को नियमानुसार भूमि के पट्टे देने की मांग उठाई गई।
मोरन नदी से लेकर सिलिकोसिस तक मुद्दे
वीरेंद्र सिंह बेडसा ने मोरन नदी की प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने और उसे पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया। ईश्वरलाल कटारा ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल घास विकसित करने, जबकि नारायणलाल रोत ने बड़े स्तर पर पौधरोपण की जरूरत बताई।
राम कुसुम रावत ने अरावली को हुए नुकसान का आकलन कराने और खनन प्रभावित क्षेत्रों में सिलिकोसिस से बचाव के प्रभावी उपाय करने की बात रखी। अन्य हितधारकों ने भी अवैध खनन रोकने, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग से जुड़े सुझाव दिए।
कार्यक्रम में समिति के सदस्य अमित आनंद, डॉ. सुभाष आशुतोष, बृजमोहन सिंह राठौड़, डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा, प्रो. जगदीश कृष्णास्वामी सहित जिला कलक्टर देशलदान, एसपी मनीष, वन एवं खनन विभाग के अधिकारी तथा पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।
