जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के चुनावी इतिहास में वसुंधरा राजे के भाजपा की कमान संभालने के बाद से भाजपा को लगातार दो बार पूर्ण बहुमत से अधिक सीटें मिली। इतनी सीटें तो कभी तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में भी भाजपा को नहीं मिली थी। कई सालों तक केन्द्र की राजनीति में सक्रिय रही वसुंधरा राजे ने साल 2002 में राजस्थान भाजपा की कमान संभाली थी।

2003 में वसुंधरा राजे की प्रदेश में निकाली गई 'परिवर्तन यात्रा' के बाद 200 विधानसभा सीटों में से 120 सीटों पर भाजपा विजयी रही थी। इसके बाद 2008 में भाजपा सत्ता से बाहर हुई,लेकिन फिर 2013 में वसुंधरा राजे की 'सुराज संकल्प यात्रा' के बाद पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और 163 विधानसभा सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की जीत हुई।

अब इस साल के अंत में फिर विधानसभा चुनाव होने है और वसुंधरा राजे ने 4 अगस्त से 'सुराज गौरव यात्रा' पर निकलने की घोषणा कर दी है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा और वसुंधरा राजे के संकल्प के सामने जो चुनौती सबसे बड़ी है वो है पार्टी का परम्परागत वोट बैँक राजपूत समाज।

राजपूत समाज के साथ ही गुर्जर समाज भी वसुंधरा राजे के लिए चुनौति बना हुआ है। भाजपा की स्थापना के बाद से ही भाजपा के परम्परागत वोट माने वाले राजपूत समाज का विरोध चुनावी साल में और बढ़ने लगा है । वहीं आरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा गुर्जर समाज भी सरकार से संतुष्ट नहीं है । जातीय समीकरणों में सियासी बिसात पर बाजी उलझती जा रही है ।

वसुंधरा सरकार से राजपूत और गुर्जर समाज की नाराजगी के कारण

राजपूत और रावणा राजपूत समाज विभिन्न मुद्दों पर वसुंधरा राजे सरकार से नाराज है। अपराधी आनंदपाल एनकाउंटर,फिल्म पद्मावती और जयपुर राजपरिवार की सम्पति राजमहल पैलेस की जमीन पर सरकार के कब्जे जैसे मसलों पर राजपूत समाज सरकार के खिलाफ कई बार सड़कों पर उतरा।

मुख्यमंत्री के विरोध में धरने-प्रदर्शन हुए। राजपूत समाज ने आगामी दिनों में गांव, तहसील और जिला स्तर पर भाजपा धिक्कार सम्मेलन करने की घोषणा की है। अक्टूबर में समाज की जयपुर में वसुंधरा धिक्कार रैली भी प्रस्तावित है। समाज की संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक गिरिराज सिंह लोटवाड़ा के अनुसार धिक्कार सम्मेलनों में 'वसुंधरा मुक्त राजस्थान', 'कमल का फूल हमारी भूल' की शपथ दिलाई जाएगी।

इधर लम्बे समय से आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर समाज सहित पांच जातियों को राज्य सरकार ने ओबीसी में 4 प्रतिशत और एमबीसी में 1 प्रतिशत आरक्षण तो दे दिया,लेकिन अन्य मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई। इस कारण गुर्जर समाज सरकार से नाराज है । 

Posted By: Preeti jha