जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। करीब दो दशक तक राजस्थान में भाजपा की पर्याय रही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कांग्रेस में जाट राजनीति का शक्ति केंद्र बनने की कोशिश में जुटे रामेश्वर डूडी के युग का लगभग अंत होता नजर आ रहा है। वसुंधरा राजे ने दो दशक तक अपनी मर्जी से भाजपा सत्ता और संगठन के फैसले किए। कई मामलों में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को वसुंधरा राजे की जिद के चलते अपने फैसले बदलने पड़े। लेकिन पिछले सप्ताह बनाए गए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और उसके बाद हो रहे पार्टी के फैसलों से वसुंधरा राजे बेखबर रहती है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की खास पसंद माने जाने वाले सतीश पूनिया वसुंधरा राजे विरोधी खेमे की अगुवाई करते है। वसुंधरा राजे सतीश पूनिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में कभी नहीं रही,वे राज्यसभा सदस्य नारायण पंचारिया अथवा सांसद रामचरण बोहरा में से किसी एक को अध्यक्ष बनवाना चाहती थी,लेकिन इस बार उनकी नहीं चली और पूनिया अध्यक्ष बन गए। यही नहीं भाजपा की आंतरिक राजनीति में वसुंधरा राजे के विरोधी माने जाने वाले नेता ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष,गजेंद्र सिंह शेखावत,कैलाश चौधरी और अर्जुन राम चौधरी केंद्र में मने बनाए गए। ये चारों ही नेता शुरू से ही वसुंधरा राजे के खिलाफ चलाई जाने वाली मुहिम में शामिल रहे है।

वसुंधरा युग के अंत का सबसे बड़ा उदाहरण तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल का एनडीए में शामिल होना रहा । भाजपा ने पहले तो लोकसभा चुनाव में बेनीवाल के लिए नागौर लोकसभा सीट छोड़ी और अब खींवसर विधानसभा सीट पर हो रहे उप चुनाव मे उनके भाई नारायण बेनीवाल को समर्थन दिया है। पूर्व सीएम स्व.भैरोंसिंह शेखावत के समय भाजपा में शामिल हुए हनुमान बेनीवाल वसुंधरा राजे के साथ पटरी नहीं बैठ पाने के कारण ही पार्टी छोड़कर गए थे। बेनीवाल ने विधायक के रूप में विधानसभा और बाहर सभाओं में वसुंधरा राजे पर जमकर हमले बोले। लेकिन अब भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने आरएसएस और प्रदेश नेतृत्व की सलाह पर बेनीवाल को एनडीए में शामिल कर लिया। विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार और लोकसभा चुनाव मे मोदी लहर के चलते प्रदेश की सभी 25 संसदीय सीटों पर हुई जीत के बाद से लगातार वसुंधरा राजे को अलग-थलग करने के प्रयास शुरू हो गए।

वसुंधरा समर्थक पाला बदलने में जुटे,डूडी की सुरक्षा हटाई

भाजपा की प्रदेश इकाई के महत्वपूर्ण निर्णयों में वसुंधरा राजे की सलाह लेना बंद कर दिया गया। वसुंधरा समर्थकों को अलग-थलग कर दिया गया। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ जैसे वसुंधरा समर्थकों ने पाला बदलते हुए नये प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को अपना नेता मान लिया।

उधर कांग्रेस में यही हाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे रामेश्वर डूडी का है । पांच साल में कांग्रेस में विपक्ष में रहते हुए रामेश्वर डूडी विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे । डूडी को कांग्रेस ने जाट नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया । जाट बहुल बीकानेर और शेखावाटी इलाकों में जाट नेता के रूप में डूडी खुद भी सक्रिय रहे। लेकिन अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस के सत्ता में आते ही रामेश्वर डूडी को अलग-थलग कर दिया गया। उनके स्थान पर गहलोत के खास कृषिमंत्री लालचंद कटारिया और राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को जाट नेता के रूप में सक्रिय किया गया । हाल ही में संपन्न राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी और डूडी खुलकर आमने-सामने हो गए।

डूडी ने आरसीए चुनाव लड़ने की घोषणा की तो जोशी ने मुख्यमंत्री के बेटे वैभव गहलोत को अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतार दिया। चुनाव के दौरान डूडी खुलकर अपनी ही सरकार के खिलाफ बोले, उन्होंने मुख्यमंत्री को धृष्तराष्ट्र तक की संज्ञा दे दी। करीब आठ दिन पहले दी गई डूडी की सुरक्षा भी हटा दी गई। डूडी का कहना है कि मैने सीएम के बेटे के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया,इस कारण मेरी सुरक्षा हटा दी गई। 

Posted By: Preeti jha

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