उदयपुर, जेएनएन। झीलों की नगरी इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है। आंकड़े बताते हैं कि उदयपुर में हर साल डेढ़ लाख से अधिक विदेशी पर्यटक तथा आठ लाख से अधिक देशी सैलानी आते हैं। पिछले तीन सालों के आंकडें दर्शाते हैं कि उदयपुर में आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या में हर साल उत्तरोत्तर पंद्रह से बीस फीसदी की वृद्धि हो रही है।

पर्यटन विभाग से मिले आंकड़ों बताते हैं कि इस साल तीसरी तिमाही तक उदयपुर में एक लाख 30 हजार 950 विदेशी पर्यटक जबकि पांच लाख 87 हजार 560 पर्यटक आ चुके हैं। वर्ष की चौथी तिमाही में सर्वाधिक पर्यटक उदयपुर आते हैं। पिछले साल 2017 में एक लाख 90 हजार 521 विदेशी तथा 8 लाख 30 हजार

964 पर्यटक आए। इससे पहले साल 2016 में एक लाख 83 हजार 905 विदेशी और 7 लाख 54 हजार 910 देशी पर्यटक आए। जबकि साल 2015 में एक लाख 64 हजार 721 विदेशी पर्यटक और 7लाख 27 हजार 266 देशी पर्यटक आए। जो साबित करते हैं कि उदयपुर में हर साल पंद्रह से बीस फीसदी अधिक पर्यटक उदयपुर आते हैं। देशी पर्यटकों में सर्वाधिक संख्या गुजरातियों की रहती है, जो दिवाली बाद हजारों की संख्या में पांच दिन तक उदयपुर में घूमने आते हैं। 

 

देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों के लिए यहां शहर में सुप्रसिद्ध पिछोला एवं फतहसागर झीलों के अलावा पिछले कुछ साल में विकसित प्रताप गौरव केंद्र, शिल्पग्राम, चीरवा स्थित फूलों की घाटी व जैव विविधता पार्क, सहेलियों की बाड़ी, बायलोजिकल पार्क, फतहसागर, गणगौर घाट, पिछोला, बागौर की हवेली, सिटी पैलेस, दूध तलाई, बड़ी तालाब, सज्जनगढ़ मानसून पैलेस देशी-विदेशी सैलानियों के लिए सर्वाधिक घूमने लायक जगह है जबकि बाहरी पर्यटन क्षेत्रों में जयसमंद झील, राजसमंद झील, कुंभलगढ़ भी ऐसे पर्यटन

स्थल हैं जहां सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं।

 

इनमें जयसमंद झील एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित मीठे पानी की झील है, जिसका व्यास 90 किलोमीटर है। जबकि कुम्भलगढ़ दुनिया का सबसे बड़ा किला है जिसकी प्राचीर चीन की दीवार के बाद सबसे लंबी है। 36 किलोमीटर लंबी प्राचीर से घिरे कुम्भलगढ़ में साढ़े तीन सौ अधिक आठवीं सदी के मंदिर हैं। हालांकि पर्यटकों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यहां के पर्यटन स्थलों की जानकारी एवं दिशा संकेतों को लेकर है।

 

Posted By: Babita