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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rajasthan: बेरोजगारी भत्ता लेने वालों को सरकारी दफ्तर में चार घंटे करना होगा काम

By Sachin Kumar MishraEdited By:
Published: Sat, 30 Oct 2021 06:36 PM (IST)

Rajasthan बेरोजगार युवाओं को राजस्थान सरकार घर बैठे बेरोजगारी भत्ता दे रही है। बेरोजगार पुरुष को प्रतिमाह चार हजार और ...और पढ़ें

राजस्थान में बेरोजगारी भत्ता लेने वालों को सरकारी दफ्तर में चार घंटे करना होगा काम। फाइल फोटो
राजस्थान में बेरोजगारी भत्ता लेने वालों को सरकारी दफ्तर में चार घंटे करना होगा काम। फाइल फोटो

जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान में बेरोजगारी भत्ता लेने वाले युवाओं को अब सरकारी दफ्तरों में प्रतिदिन चार घंटे काम करना होगा। प्रदेश में यह काम इंटर्नशिप के तौर पर करना होगा। प्रदेश में यह योजना एक जनवरी, 2022 से लागू होगी। इसके लिए राजस्थान स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन (आरएसएलडीसी) से तीन माह का कोर्स भी करना होगा। वर्तमान में बेरोजगार युवाओं को राजस्थान सरकार घर बैठे बेरोजगारी भत्ता दे रही है। बेरोजगार पुरुष को प्रतिमाह चार हजार रुपये और बेरोजगार महिला को 4500 रुपये भत्ता दिया जा रहा है। इसके लिए स्नातक और परिवार की वार्षिक आय दो लाख से कम होने की शर्त है। इस संबंध में श्रम, नियोजन और रोजगार विभाग ने मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के नियमों में संशोधन कर अब चार घंटे प्रतिदिन काम करने और कोर्स करने का प्रावधान किया जा रहा है।

सरकारी कर्मचारियों की तरह मिलेगा भत्ता

राजस्थान में सामान्य वर्ग के युवाओं को 30 साल तक और आरक्षित वर्ग के बेरोजगारों को 35 साल तक बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। प्रदेश के एक परिवार में केवल दो ही युवाओं को भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। नए प्रावधान के अनुसार, बेरोजगार युवाओं को इंटर्नशिप के लिए श्रम विभाग की तरफ से दफ्तर आवंटित किए जाएंगे। अगर कोई युवक इंटर्नशिप बीच में छोड़ देगा तो उसका भत्ता भी बंद हो जाएगा। प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की तरह इन्हें भत्ता मिलेगा। मनरेगा और प्रधानमंत्री रोजगार योजना में काम करने वालों, केंद्र या राज्य सरकार की स्कालरशिप लेने वालों, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें भत्ता नहीं मिलेगा। सरकारी दफ्तरों में बेरोजगार युवाओं से काम कराने का मुख्य मकसद इन्हें कामकाज का अनुभव कराना है। कर्मचारियों की भर्ती नियमित होने तक इनके माध्यम से सरकारी दफ्तरों में काम कराने से प्रकरणों के निस्तारण में देरी भी आएगी। कई विभागों में स्टाफ की कमी के कारण फाइलों का निस्तारण समय पर नहीं हो पाता है।